लखनऊ। केजीएमयू में तैनात ठेका कर्मियों से मानव संसाधन की आपूर्ति करने वाली कम्पनियां सर्विस टेक्स व जीएसटी के नाम पर पैसा ले रही हैं। इससे ठेका कर्मियों में आक्रोश व्याप्त होता जा रहा है। जानकारों की माने तो जल्द ही यदि इसका हल नहीं निकाला गया तो ठेका कर्मियों का आक्रोश बड़ा रूप ले सकता है,जिसका खामियाजा गरीब जनता को उठाना पड़ेगा। ठेका कर्मियों की माने तो एक तो कम वेतन उस पर से १८ प्रतिशत जीएसटी कम्पनियों द्वारा लिया जा रहा है। इस कारण से घर चलाना मुश्किल हो रहा है,इस आर्थिक मार को अब वो झेल नहीं पा रहे हैं।
केजीएमयू में स्कील्ड व अनस्कील्ड दो प्रकार के कर्मचारी ठेके पर मानव संसाधन की आपूर्ति करने वाली कम्पनियों ने नियुक्त किया है। अनस्किल्ड ठेका कर्मचारियों को कागज पर ११००० रूपये दिया जा रहा है। जिसमें ईपीएफ, सर्विस चार्ज,सर्विस टेक्स व जीएसटी के नाम पर रूपये काटे जा रहे है। जिसके बाद कम्पनी द्वारा ठेका कर्मीयों के हाथ में ७४०० रूपये दिये जाने का दावा किया जाता है।
जबकि स्थित इसके बिलकुल अलग है। ठेका कर्मियों की माने तो अनस्किल्ड कर्मियों को हाथ में ६५०० रुपये ही आते हैं। जिसमें जीएसटी के नाम पर १६७० रुपये कम्पनी काट रही है। ऐसे में कर्मचारियों को घर चलाना मुश्किल हो रहा है। वहीं केजीएमयू के रजिस्टार राजेश राय के मुताबिक जीएसटी तो सेवा प्रदाता कम्पनी को देनी चाहिए। ठेका कर्मियों से जीएसटी लिये जाने की जानकारी की जायेगी साथ ही यह कितना उचित है और अनुचित इसकी भी जानकारी की जायेगी।















