लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के प्लास्टिक सर्जरी विभाग में जल्द ही हाथ का प्रत्यारोपण करने की कवायद शुरु हो गयी है। जल्द ही शासन व तकनीकतौर पर अनुमति लेने की कोशिश की जाएगी। माइक्रो वस्कुलर सर्जरी में कामयाबी हासिल की है आैर इसके आधार पर अंगों का प्रत्यारोपण करना आसान हो गया है।
प्लास्टिक विभाग के वरिष्ठ सर्जन व चिकित्सा अधीक्षक डा. विजय कुमार बताते है कि प्लास्टिक सर्जरी में अंगों की माइक्रो वस्कुलर सर्जरी से सर्जरी का नया आयाम शुरु हुआ है। पहले ग्राफटिंग करने में दिक्कत आती थी,अब कही से भी रक्तवाहिका सहित कोशिकाओं की ग्राफिंग कर दी जाती है। इसमें माइक्रोसर्जरी के माध्यम से छोटी से छोटी रक्तवाहिका को जोड़ दिया जाता है। इसके बाद बहुत कम समय में मरीज बेहतर हो जाता है। इसमें सबसे ज्यादा एक्सीडेंट में जबड़ा या ओरल मैक्सीलोफेशियल में जबड़े की सर्जरी करते हुए जबड़े की हड्डी व मांसपेशियों ग्राफटिंग कर दी जाती है। उन्होंने बताया कि कटे हाथ, अगंुलियां के अलावा एक्सीडेंटल मामले में माइक्रो सर्जरी बेहद कारगर है।
उन्होंने बताया कि प्लास्टिक सर्जरी विभाग के प्रमुख डा. एके सिंह के नेतृत्व में बर्न यूनिट भी तैयार हो रही है। जिसको जल्द ही शुरु कर दिया जाएगा। इस यूनिट की आईसीयू में 12 बिस्तर व वार्ड में तीस बिस्तर होंगे। उन्होंने बताया कि वर्तमान में एसिड अटैक के मरीजों का इलाज कि या जा रहा है। डा. विजय कुमार ने बताया कि विभाग में लगभग सभी प्रकार की सर्जरी हो रही है। केजीएमयू में किडनी प्रत्यारोपण के साथ ही हाथ का प्रत्यारोपण की शुरू करने का प्रस्ताव है। अभी इसके लिए कोई ठोस योजना नहीं बनी है, लेकिन जल्द ही अंजाम दिया जाएगा।












