ब्राउन हार्ट: स्क्रीन से परे, भारत के दिल तक
लखनऊ में बढ़ा दिल की बीमारियों पर मंथन
लखनऊ स्थित संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SGPGI) में कम उम्र के भारतीयों में बढ़ती दिल की बीमारियों को लेकर एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया। ‘दिल से दिल की बात: एशियाई भारतीयों के दिल को समझना’ शीर्षक वाले इस कार्यक्रम में कार्डियोलॉजिस्ट, फिल्म निर्माता और संस्थान के शीर्ष नेतृत्व ने हिस्सा लिया।
डॉक्यूमेंट्री ‘द ब्राउन हार्ट’ का प्रदर्शन
सत्र के दौरान KGMU के पूर्व छात्र और वर्तमान में अमेरिका में कार्यरत फिजिशियन-फिल्म निर्माता डॉ. निर्मल जोशी एवं डॉ. रेनू जोशी ने अपनी बहुचर्चित डॉक्यूमेंट्री ‘द ब्राउन हार्ट’ के मुख्य अंश दिखाए। 100 घंटे से अधिक के इंटरव्यू और गहन मेडिकल रिसर्च पर आधारित यह फिल्म बताती है कि दक्षिण एशियाई लोगों में कम उम्र में और गंभीर हार्ट अटैक क्यों आते हैं।
वैश्विक व राष्ट्रीय स्तर पर चिंताजनक आंकड़े
वैश्विक आंकड़े: वर्ष 2022 में कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों से 1.98 करोड़ मौतें हुईं, जो कुल मौतों का लगभग 32% है।
भारत की स्थिति: WHO के अनुसार, भारत में 27% मौतें दिल की बीमारियों से होती हैं, जिसमें अधेड़ उम्र के लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
विशेषज्ञों की राय और चेतावनियां
डॉ. आदित्य कपूर (विभागाध्यक्ष, कार्डियोलॉजी): भारतीयों को दिल की सेहत पर बहुत पहले और खुलकर बात शुरू करनी चाहिए।
डॉ. रूपाली खन्ना: महिलाओं में दिल की बीमारियों के अनदेखे लक्षणों और जोखिमों पर समय रहते ध्यान देने की जरूरत है।
प्रो. आर.के. धीमन (निदेशक, SGPGI): “सेहत कोई लग्जरी नहीं, रोज का चुनाव है।” उन्होंने निष्क्रिय जीवनशैली, स्क्रीन टाइम, फास्ट फूड और तनाव को युवाओं के लिए बड़ा खतरा बताया।
जीन्स बनाम जीवनशैली: संदेश और समाधान
डॉ. जोशी ने स्पष्ट किया कि “जीन्स भले ही बंदूक में गोली भर दें, लेकिन जीवनशैली ही ट्रिगर दबाती है।” हालांकि आनुवंशिक कारण भूमिका निभाते हैं, लेकिन 80% जोखिम को जीवनशैली बदलकर नियंत्रित किया जा सकता है।
मुख्य बचाव उपाय:
आंकड़ों की जानकारी: बीपी, शुगर, कोलेस्ट्रॉल और वजन की नियमित जांच कराएं।
स्वस्थ आदतें: तंबाकू से दूरी, तनाव प्रबंधन, शारीरिक गतिविधि और संतुलित खानपान अपनाएं।
सत्र का समापन डॉ. निर्मल जोशी, डॉ. रेनू जोशी, डॉ. कपूर, डॉ. तिवारी, डॉ. रूपाली खन्ना और डॉ. अंकित साहू के साथ एक सवाल-जवाब दौर से हुआ। संदेश साफ है—भारतीयों को अब किसी चेतावनी नहीं, बल्कि आज से ही जीवनशैली में बदलाव की जरूरत है।












