लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा पचास से ज्यादा कर्मियों पर कार्रवाई के निर्देश पर आक्रोश व्याप्त हो गया है। कर्मचारियों का आरोप है कि काफी संख्या में ऐसे कर्मचारी है, जिन पर न तो कोई साक्ष्य है आैर न तो शिकायत ही की गयी है। इस मुद्दे पर कर्मचारी परिषद के पदाधिकारी कुलपति से वार्ता करके अपना पक्ष रख कर समस्या का निराकरण कराने की कोशिश करेंगे।
बताते चले कि केजीएमयू में कु लपति लेफ्टिनेंट जनरल डा. विपिन पुरी ने लम्बे समय से गायब चल रहे दो कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया था। इसके अलावा दो अन्य पर सख्त कार्रवाई की संस्तुति कर दिया गया है। इसके साथ ही 68 कर्मचारियों पर कार्रवाई की जा रही है। इस पर कर्मचारी परिषद के अध्यक्ष प्रदीप गंगवार का कहना है कि जो कर्मचारी अनुशासन हीनता कर रहा है आैर ड¬ूटी में गड़बड़ी कर रहा है। उस पर कार्रवाई करना तो जायज है, लेकिन 66 में 50 कर्मचारी ऐसे है जिनकी न तो कोई शिकायत नही है आैर न ही कोई साक्ष्य है। ऐसे में कार्रवाई की जा रही है तो केजीएमयू प्रशासन शिकायती पत्र व साक्ष्य होने की जानकारी देगा तब ही कार्रवाई की जा सकती है। उनका कहना है कि आरोप है कि ड¬ूटी पर तैनात पीआरओ व अन्य जिम्मेदार अधिकारी कोई फोन नहीं उठाते है। प्रदीप क कहना है कि पीआरओ व अन्य जिम्मेदारों में छह सात के पास ही सीयूजी नम्बर है, जब कि आरोप सभी लगा दिया गया है। उन्होंने बताया कि काम कराने के लिए रुपये लिए जाने वाला आरोप भी निराधार है। शिकायत की पहले जांच करा लेनी चाहिए। उनका कहना है कि काफी संख्या में कर्मी ऐसे भी ड¬ूटी कर रहे है जिनकी तैनाती पद के अनुरूप नही है। वह क्लीनिकल या मरीजों के कार्य से नहीं जुड़े है। ऐसे में वह भर्ती कराने व अन्य क्लीनिक कार्य के लिए रुपये क्यो लेने लगेंगे। अध्यक्ष गंगवार का कहना है कि कल कुलपति से वार्ता की जाएगी। इसके बाद कर्मचारियों संग बैठक करके आगे की रणनीति बनेगी