डायबिटीज जागरूकता दिवस की पूर्व संध्या पर डायबिटीज की आशंका वाले मरीजों के लिए एक खुशखबरी है. रिसर्च करने वाले वैज्ञानिकों ने एक ऐसा यंत्र तैयार किया है जो कि ब्लड से नहीं बल्कि मरीज के पसीने की जांच करने के बाद बता देगा कि उसे डायबिटिज होने वाला है या नहीं है या वर्तमान में उस मरीज की डायबिटीज किस स्थिति में है. विदेश में हुए शोध में रिसर्च टीम मैं भारतीय बल का वैज्ञानिक भी शामिल है शोधकर्ताओं का मानना है यह यंत्र पसीने के साथ डायबिटीज पर भी नजर रखेगा इस यंत्र को मरीज अपनी जेब सकेगा.
अन्य स्थिति में इसे गले में पहना जा सकता है इस दौरान भी यंत्र में लगे संवेदनशील उपकरण मरीज की बीमारी पर भी ध्यान रखेगा. बताया जाता है यह उपकरण मरीज के पसीने में डायबिटीज से जुड़े तीन योगिक की सूक्ष्म से सूक्ष्म मात्रा को पहचान लेता है . शोधकर्ताओं के मुताबिक यह योग एक एक दूसरे से जुड़े रहते हुए पसीने में बने रहते हैं. इस यंत्र के आधार पर डायबिटीज के लक्षणों को आसानी से पकड़ा जा सकेगा. इस बारे में अमेरिका की डलास की टैक्सस विश्वविद्यालय की प्रोफेसर शालिनी मानना है डायबिटीज में टाइप 2 बहुत तेजी से लोगों को प्रभावित करता है अगर इस बीमारी का प्रबंधन सही तरीके से किया जाए तो इसके नुकसान से बचा जा सकता है. लखनऊ के किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ डॉक्टर कौसर उस्मान का भी मानना है डायबिटीज में इलाज के साथ अगर अनुशासित जीवन व्यतीत करते हुए व्यायाम पर ध्यान दिया जाए तो इस बीमारी पर नियंत्रण रखा जा सकता है. उनका मानना है कि यहां भी डायबिटीज के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं ज्यादातर युवाओं में डायबिटीज हो रही है. उन्होंने बताया बदलते परिवेश में हर क्षेत्र में कंपटीशन के चक्कर में व्यायाम वह सही भोजन समय पर नहीं हो पाता है इसके साथ ही बनाओ ब्लड प्रेशर शुरू हो जाता है डायबिटीज कब शुरू हो जाती है पता ही नहीं चलता .उसके बाद दवाओं सेतो इलाज किया जाता है पर अनुशासन और व्यायाम नहीं हो पाता है. अब तो बच्चों में भी डायबिटीज देखी जाने लगी है और इसकी संख्या भी बढ़ रही है.












