केजीएमयू को चिकित्सा शिक्षा विभाग ने कार्रवाई के लिए निर्देश
लखनऊ । किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में मतांतरण और महिला कर्मचारियों के उत्पीड़न के मामले में स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की जांच रिपोर्ट में कई बड़े खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट में पैथोलॉजी, गांधी वार्ड, माइक्रोबायोलॉजी और रेडियोलॉजी विभागों के कुछ डॉक्टरों पर मतांतरण के इस नेटवर्क में शामिल होने का गंभीर आरोप लगाया गया है।
प्रमुख खुलासे और नेटवर्क का दायरा
इस्लामिक मेडिकोज समूह: जांच में ‘इस्लामिक मेडिकोज’ नामक एक समूह के संचालन और इंटीग्रल विश्वविद्यालय से जुड़े कुछ संदर्भों की बात सामने आई है।
फंडिंग का कनेक्शन: मुस्लिम डॉक्टरों का पैसा एक अन्य मेडिकल कॉलेज में निवेश किए जाने का भी रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है।
शिकायतें दबाने की कोशिश: एसटीएफ के एडीजी अमिताभ यश द्वारा तैयार रिपोर्ट में यह भी उजागर हुआ है कि शुरुआती स्तर पर आरोपियों को संरक्षण देने और शिकायतों को दबाने का प्रयास किया गया था।
शासन सख्त, कार्रवाई के निर्देश
एसटीएफ रिपोर्ट के आधार पर चिकित्सा शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव आनंद कुमार त्रिपाठी ने केजीएमयू के कुलसचिव को पत्र भेजा है। पत्र में चिन्हित सभी कर्मियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई करने और उसकी रिपोर्ट शासन को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
रिपोर्ट में सामने आया है कि कुछ महिला रेजिडेंट डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य महिला कर्मियों को कथित तौर पर प्रेम जाल में फंसाकर मतांतरण के लिए प्रेरित किया जाता था। निकाह का दबाव बनाने और विरोध करने पर उनके करियर को बर्बाद करने की धमकियां दी जाती थीं।
दर्ज मुकदमों और विभागों का विवरण
चौक थाना मुकदमा: महिला रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. देवव्रती मित्रा की शिकायत पर 23 दिसंबर 2025 को चौक थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। पैथोलॉजी विभाग के रेजिडेंट डॉक्टर रमीज पर महिला डॉक्टर को प्रेम जाल में फंसाकर मतांतरण का दबाव बनाने का आरोप है, जिन्हें इस वर्ष 9 जनवरी को गिरफ्तार किया जा चुका है।
अन्य मामले: पैथोलॉजी विभाग के ही रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. आदिल से जुड़े मामले में एक महिला कर्मचारी की शिकायत पर 29 दिसंबर 2025 को मुकदमा दर्ज हुआ था। इन दोनों मामलों की जांच जारी है।
गांधी वार्ड और माइक्रोबायोलॉजी: गांधी वार्ड से जुड़े नर्सिंग स्टाफ नफीस, पुरकान और रेजिडेंट डॉक्टर आदिल पर महिला नर्सिंग कर्मियों के उत्पीड़न और धर्मांतरण के लिए प्रेरित करने के आरोप हैं। वहीं, माइक्रोबायोलॉजी विभाग में संविदा कंप्यूटर ऑपरेटर ज्योति राव की शिकायत पर वरिष्ठ कर्मचारी शाकत अली पर उत्पीड़न के आरोप लगाए गए हैं, हालांकि शिकायतों के बावजूद पूर्व में अपेक्षित कार्रवाई न होने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है।












