दो घंटे किया कार्य बहिष्कार, अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी

लखनऊ। अपनी 13 सूत्रीय लंबित मांगों को लेकर राजकीय नर्सेस संघ, उत्तर प्रदेश का आंदोलन लगातार उग्र रूप धारण करता जा रहा है। संघ के आह्वान पर 31 अक्टूबर को आंदोलन के 23वें दिन भी प्रदेश भर के समस्त जिला अस्पतालों और राजकीय मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग संवर्ग ने ‘काला दिवस’ मनाया। इस दौरान सुबह 8 बजे से 10 बजे तक 2 घंटे का कार्य बहिष्कार जारी रहा।

यह आंदोलन गत 9 अक्टूबर से लगातार चलाया जा रहा है। संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि प्रदेश के उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक और अपर मुख्य सचिव अमित घोष के साथ हुई वार्ता में कई मांगों पर सहमति बन चुकी है, लेकिन अब तक उनका शासनादेश (GO) जारी नहीं किया गया है।
जब तक शासनादेश नहीं, तब तक जारी रहेगा प्रदर्शन
राजकीय नर्सेस संघ के महामंत्री अशोक कुमार ने स्पष्ट किया कि जब तक शासन स्तर पर बनी सहमति के अनुसार आधिकारिक आदेश निर्गत नहीं होते, तब तक दैनिक 2 घंटे का कार्य बहिष्कार अनवरत जारी रहेगा। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि शासनादेश जारी करने में और विलंब किया गया, तो आंदोलन को अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदला जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
नर्सेस संघ की 8 प्रमुख मांगें:
पारदर्शी स्थानांतरण नीति: गृह जनपद में तैनाती और पारदर्शी ट्रांसफर पॉलिसी लागू की जाए।
समयबद्ध पदोन्नति: निदेशालय से लेकर अस्पताल स्तर तक रिक्त पदों पर जल्द प्रमोशन हो।
पालनाघर (क्रेच) की सुविधा: महिला कर्मचारियों के लिए अस्पतालों में क्रेच की व्यवस्था की जाए।
सवेतन अध्ययन अवकाश: उच्च शिक्षा के लिए बीएससी नर्सिंग की तर्ज पर सवेतन लीव दी जाए।
कर्मचारियों का समायोजन: जिला अस्पतालों से मेडिकल कॉलेज में उच्चीकृत संस्थानों के स्टाफ को वहीं समायोजित किया जाए और पद समाप्त न हों।
समान भत्ते: उच्च संस्थानों की तर्ज पर समान भत्तों का भुगतान हो।
प्रशासनिक पदों पर पदोन्नति: चिकित्सा शिक्षा विभाग में नर्सिंग के उच्च व प्रशासनिक रिक्त पदों पर तत्काल प्रमोशन दिया जाए।
ACP का लाभ: सभी पात्र कार्मिकों को समयबद्ध एसीपी (ACP) का लाभ मिले।
राजकीय नर्सेस संघ ने शासन से अपील की है कि वार्ता में तय हुई सहमतियों का सम्मान करते हुए तुरंत शासनादेश जारी कर गतिरोध को समाप्त किया जाए।












