सुरक्षा टीम ने दबोचकर पुलिस को सौंपा
लखनऊ। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI) परिसर में सोमवार को सुरक्षाकर्मियों की सतर्कता से अवैध रूप से पैसे लेकर रक्तदान (Professional Blood Donor) कराने वाले गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। संस्थान के ब्लड बैंक के सामने पैसे के लेन-देन को लेकर आपस में भिड़े कुछ युवकों को सुरक्षा टीम ने पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया है।
ब्लड बैंक के बाहर गाली-गलौज और हंगामा
मिली जानकारी के अनुसार, एसजीपीजीआई के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग (ब्लड बैंक) के सामने कुछ व्यक्ति खून देने के एवज में रुपयों के लेन-देन को लेकर आपस में विवाद और गाली-गलौज कर रहे थे। गश्त पर तैनात पेट्रोलिंग गार्ड की नज़र जब इस घटना पर पड़ी, तो उसने तुरंत इसकी सूचना संस्थान के सुरक्षा अधिकारी को दी।
सुरक्षा टीम और पुलिस की त्वरित कार्रवाई
सूचना मिलते ही संस्थान के सुरक्षा अधिकारी अपनी पूरी टीम और पुलिस बल के साथ तत्काल मौके पर पहुंचे। सुरक्षा बलों ने हंगामा कर रहे सभी व्यक्तियों को मौके पर ही दबोच लिया और संस्थान की पुरानी ओपीडी (OPD) स्थिति पुलिस चौकी पर ले आई। पुलिस द्वारा की गई कड़ी पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया कि वे पैसे के बदले रक्तदान करने आए थे।
संस्थान का स्पष्ट संदेश: रक्तदान पूरी तरह स्वैच्छिक
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसजीपीजीआई प्रशासन और ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग ने अपना रुख स्पष्ट किया है। संस्थान के अनुसार:
राष्ट्रीय नियमों और दिशानिर्देशों के तहत ज़रूरतमंद मरीजों को समय पर, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण रक्त घटक (Blood Components) उपलब्ध कराना ही संस्थान का मुख्य उद्देश्य है।
इलाज कर रहे डॉक्टरों द्वारा अस्पताल सूचना प्रणाली (HIS) पर रक्त घटकों की मांग दर्ज की जाती है, जो मरीज के ब्लड सैंपल के साथ ब्लड सेंटर में प्राप्त होती है।
कम्पैटिबिलिटी टेस्ट (अनुकूलता परीक्षण) के बाद ही आवश्यक रक्त घटक जारी किए जाते हैं।
रक्तदान पूरी तरह स्वैच्छिक (Voluntary) है और पैसे देकर या लेकर रक्तदान कराना पूरी तरह से गैर-कानूनी और अनुचित है।
आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज
संस्थान के सुरक्षा अधिकारी की तहरीर पर पुलिस प्रशासन को पूरे घटनाक्रम की लिखित सूचना दे दी गई है। पुलिस ने मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित कानूनी धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।












