नर्सेस संघ का आंदोलन तेज: रोजाना दो घंटे कार्य बहिष्कार जारी, अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी

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​लखनऊ। प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। अपनी 13 सूत्रीय लंबित मांगों को लेकर राजकीय नर्सेस संघ उत्तर प्रदेश के आह्वान पर प्रदेशभर के सभी राजकीय चिकित्सालयों और मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग संवर्ग का आंदोलन लगातार जारी है। पिछले कई हफ्तों से चल रहे इस आंदोलन के तहत नर्सेस रोजाना सुबह दो घंटे का कार्य बहिष्कार कर रही हैं, जिससे अस्पतालों की व्यवस्थाएं आंशिक रूप से लड़खड़ा रही हैं।

​संघ का कड़ा रुख है कि जब तक शासन स्तर से सहमति वाली मांगों का आधिकारिक शासनादेश जारी नहीं होता, तब तक यह विरोध प्रदर्शन किसी भी सूरत में थमेगा नहीं।
​मंत्रियों और अधिकारियों के साथ बनी सहमति पर अब तक अमल नहीं
​संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और अपर मुख्य सचिव अमित घोष के साथ हुई बैठकों में उनकी कई प्रमुख मांगों पर सैद्धांतिक सहमति बन चुकी है। इसके बावजूद, अब तक कोई लिखित शासनादेश जारी न होना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाता है। संघ का साफ कहना है कि केवल मौखिक आश्वासनों से अब काम नहीं चलेगा, बल्कि धरातल पर ठोस कार्रवाई और शासनादेश का निर्गत होना आवश्यक है।

​प्रमुख मांगें जिन पर टिकी हैं निगाहें
​नर्सिंग संवर्ग की मुख्य मांगों में निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:
​गृह जनपद में तैनाती: नर्सिंग कर्मियों के लिए उनके गृह जनपदों में तैनाती और सुगम स्थानांतरण नीति लागू की जाए।
​समयबद्ध पदोन्नति: निदेशालय से लेकर अस्पताल स्तर तक रिक्त पदों पर नियमानुसार पदोन्नति प्रक्रिया पूरी हो।
​क्रेच सुविधा: कार्यस्थलों पर महिला व पुरुष कर्मचारियों के बच्चों की उचित देखभाल के लिए पालनाघर (क्रेच) की व्यवस्था हो।

​सवेतन उच्च शिक्षा अवकाश: बीएससी नर्सिंग की तर्ज पर अन्य नर्सिंग कर्मियों को भी उच्च शिक्षा के लिए सवेतन अवकाश मिले।
​सेवा सुरक्षा: जिला चिकित्सालयों के मेडिकल कॉलेज में उच्चीकृत होने पर वहां कार्यरत नर्सेस के पद और सेवा हितों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
​भत्ते और एसीपी: उच्च संस्थानों की तर्ज पर समान भत्ते और चिकित्सा शिक्षा विभाग के पात्र कर्मियों को समयबद्ध एसीपी का लाभ मिले।

​अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी
​राजकीय नर्सेस संघ ने शासन-प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही शासनादेश जारी नहीं किया गया, तो इस आंदोलन को और अधिक व्यापक रूप दिया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर संघ शीघ्र ही अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा कर सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। वर्तमान में दो घंटे के इस कार्य बहिष्कार से स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहे असर को देखते हुए मरीजों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, और अब सबकी निगाहें शासन के अगले कदम पर टिकी हैं।

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