लखनऊ। शिक्षा जगत में साक्षरता से लेकर उच्च शिक्षा तक उल्लेखनीय कार्य करने वाली प्रख्यात संस्था नवविहान ने पांच राज्यों के बाद उत्तर प्रदेश में भी अपनी गतिविधियों का विस्तार किया। इसी क्रम में रविवार को राजधानी लखनऊ के सहकारिता भवन में शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली विभूतियों को चाणक्य सम्मान से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कैंसर अस्पताल के निदेशक प्रो. डॉ. एम.बी. भट्ट ने कहा कि चाणक्य प्रत्येक विधा में पारंगत थे। चाहे अर्थशास्त्र हो, गुरु के रूप में भूमिका, सामाजिक क्षेत्र हो या राजनीति और रणनीति, हर क्षेत्र में उनका योगदान अद्वितीय रहा।
प्रख्यात शिक्षाविद् प्रो. अमरीक सिंह ने कहा कि चाणक्य को समझने के लिए उनके विचारों में गहराई से उतरना होगा। केवल कुछ किताबें पढ़कर उन्हें नहीं समझा जा सकता। चाणक्य ने भारत को ऐसी विरासत दी, जिस पर आज भी देश गौरवान्वित होता है। भारत की उपलब्धियों में उनके योगदान को नकारा नहीं जा सकता।
न्यायमूर्ति एस.एस. उपाध्याय ने कहा कि कार्यक्रम में आने से पहले उनके मन में जिज्ञासा थी कि किन लोगों को चाणक्य सम्मान दिया जाना है। चाणक्य के नाम का आकर्षण ही उन्हें यहां खींच लाया। उन्होंने कहा कि सम्मानित होने वाली विभूतियों को सम्मानित कर वह स्वयं भी गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। न्यायमूर्ति शिवेंद्र मिश्र और एमएलसी अवनीश सिंह ने भी चाणक्य के योगदान पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर वंदना राय, डॉ. शिखा श्रीवास्तव, डॉ. पीयूष श्रीवास्तव, डॉ. सुधांशु सिन्हा, सुधीर आर्या, नवनीत सिंह, डॉ. दीपक श्रीवास्तव, आनंद कृष्ण मिश्र, रेनू अग्निहोत्री, प्रो. डॉ. दुर्गेश मणि त्रिपाठी, प्रिया रघुवंशी, विनीत सक्सेना, शुभम जगदीश और डॉ. जी.के. श्रीवास्तव को चाणक्य सम्मान से नवाजा गया।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो. अमरीक सिंह, न्यायमूर्ति एस.एस. उपाध्याय, न्यायमूर्ति शिवेंद्र मिश्र और एमएलसी अवनीश सिंह उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने चयनित प्रतिभाओं को सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन दिलीप यशवर्धन ने किया। संस्था की अध्यक्ष डॉ. ज्योति श्रीवास्तव ने अतिथियों को शॉल पहनाकर और स्मृति चिह्न भेंट कर उनका स्वागत किया।












