हरिद्वार। भारतीय शिक्षा बोर्ड (BSB) द्वारा आयोजित दो दिवसीय ‘BSB द्वितीय नेशनल योग प्रतियोगिता 2026-27’ में हरिद्वार स्थित आचार्यकुलम के विद्यार्थियों ने अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया है। वाराणसी में 26 और 27 सितंबर को संपन्न हुई इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में देशभर के करीब 130 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जहां आचार्यकुलम के बाल-योगियों ने अपनी एकाग्रता, शारीरिक संतुलन और अनुशासन के दम पर कुल 30 स्वर्ण (Gold) और 2 रजत (Silver) पदक अपने नाम किए।
अंडर-14 वर्ग: निवेदिता, यशोदा और अमृत का दोहरा स्वर्ण
अंडर-14 आयु वर्ग के मुकाबलों में आचार्यकुलम के खिलाड़ियों का दबदबा रहा।
निवेदिता, यशोदा देवी और अमृत सिन्हा ने शानदार योग-कौशल दिखाते हुए 2-2 स्वर्ण पदक हासिल किए।
प्रणीत ने 1 स्वर्ण व 1 रजत पदक जीता।
अनाया पंडित ने 1 स्वर्ण पदक जीतकर विद्यालय की पदक तालिका को मजबूती दी।
अंडर-17 और 19 वर्ग: पदकों की बारिश से विरोधी पस्त
अंडर-17 वर्ग में अर्थव सिंह नेगी, यथार्थ साह, यति यस्वी और तनिष्क अग्रवाल ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 2-2 स्वर्ण पदकों पर कब्जा जमाया, जबकि प्रतिष्ठा यादव ने 1 स्वर्ण और 1 रजत पदक अपने नाम किया।
वहीं, अंडर-19 वर्ग में भी आचार्यकुलम का विजय रथ जारी रहा:
दोहरा स्वर्ण (2-2 Gold): नील नितिन मुकेश, सर्विल मोरेश्वर डोंगरे, अलका शर्मा, प्रारंभिक मिश्रा और अविशी अवी।
एक-एक स्वर्ण (1-1 Gold): गोपाल सिंह और दक्ष मलिक।
योगऋषि रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने दी बधाई
विद्यार्थियों की इस ऐतिहासिक सफलता पर पतंजलि योगपीठ और आचार्यकुलम परिवार में जश्न का माहौल है। परम पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज और श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज के मार्गदर्शन एवं आशीर्वाद से विद्यार्थियों ने यह मुकाम हासिल किया है।
विद्यालय की उपाध्यक्षा डॉ. ऋतंभरा, प्रधानाचार्या श्रीमती स्वाति मुंशी, उप-प्रधानाचार्य तपस बेरा, मुख्य समन्वयिका श्रीमती दीपा और हॉस्टल चीफ वार्डन अमित दानी समेत समस्त शिक्षक वृंद ने विजेता खिलाड़ियों और उनके प्रशिक्षकों की सराहना की।
”यह राष्ट्रीय उपलब्धि केवल पदकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आचार्यकुलम में रोपे जा रहे योग, अनुशासन और संस्कारों का प्रत्यक्ष प्रमाण है। यह सफलता अन्य विद्यार्थियों को भी खेलों में आगे बढ़ने की प्रेरणा देगी।”
— विद्यालय प्रबंधन
नियमित अभ्यास और दृढ़ संकल्प के बल पर आचार्यकुलम के योगियों की यह स्वर्णिम सफलता विद्यालय के खेल इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गई है।












