नौ अक्टूबर से चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान

लखनऊ। पूर्व में बनी लिखित सहमति के बावजूद 13-सूत्रीय मांगों का शासनादेश (G.O.) निर्गत न होने के विरोध में उत्तर प्रदेश के राजकीय नर्सेस संघ ने शासन-प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बलरामपुर चिकित्सालय स्थित विज्ञान भवन में आयोजित प्रांतीय कार्यकारिणी की बैठक में सर्वसम्मति से 9 अक्टूबर से प्रदेशव्यापी चरणबद्ध आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया गया है।
सहमति के बाद भी आदेश न होने से गहराया असंतोष
संघ की अध्यक्ष शर्ली भण्डारी और महामंत्री अशोक कुमार के नेतृत्व में हुई इस बैठक में प्रदेशभर से आए मंडल अध्यक्षों, जिलाध्यक्षों और वरिष्ठ पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। संघ का कहना है कि उच्च संस्थानों के समान भत्ते, गृह जनपद में नियुक्ति, एसीपी (ACP), पदोन्नति, पालनाघर (क्रेच) की सुविधा, उच्च शिक्षा हेतु सवेतन अवकाश और मेडिकल कॉलेजों से हटाए जा रहे नर्सिंग संवर्ग के समायोजन जैसी प्रमुख मांगों पर पूर्व में उप मुख्यमंत्री, अपर मुख्य सचिव और महानिदेशक (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य) स्तर पर लिखित सहमति बन चुकी है। इसके बावजूद आज तक शासनादेश जारी नहीं किया गया, जिससे कर्मचारियों में भारी आक्रोश है।
आंदोलन की रूपरेखा: काला फीता बांधने से लेकर धरना तक
शासन की उपेक्षा से नाराज राजकीय नर्सेस संघ ने आंदोलन के निम्नलिखित चरणों की घोषणा की है:
9 अक्टूबर से: प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में नर्सेस काला फीता बांधकर विरोध दर्ज कराते हुए कार्य करेंगी।
21 अक्टूबर: प्रतिदिन दो घंटे का कार्य बहिष्कार किया जाएगा।
22 अक्टूबर (बृहस्पतिवार): प्रातः 11 बजे स्वास्थ्य महानिदेशालय, लखनऊ पर प्रदेशभर से जुटने वाले नर्सेस संवर्ग द्वारा विशाल धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार की चेतावनी: यदि 22 अक्टूबर तक मांगों का शासनादेश जारी नहीं होता है, तो प्रदेश भर की नर्सेस अनिश्चितकाल के लिए प्रतिदिन प्रातः 8:00 बजे से 10:00 बजे तक कार्य बहिष्कार करेंगी।
शासनादेश जारी करने की अपील
संघ के पदाधिकारियों ने स्वास्थ्य महानिदेशक के साथ-साथ उप मुख्यमंत्री व अपर मुख्य सचिव को पत्र भेजकर चेतावनी दी है कि मरीजों को होने वाली किसी भी संभावित असुविधा से बचने के लिए पूर्व सहमति के आधार पर तत्काल शासनादेश जारी किया जाए, ताकि प्रस्तावित आंदोलन को टाला जा सके।












