सिर या चेहरे की बनावट में है बदलाव? न करें बड़े होने का इंतजार, इलाज कराये

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3D प्रिंटिंग और घुलने वाले स्क्रू से इलाज हुआ आसान

​लखनऊ। यदि जन्म के समय किसी बच्चे के सिर, चेहरे, होंठ या जबड़े की बनावट में कोई अंतर या विकृति नजर आ रही है, तो उसके बड़े होने या स्कूल जाने का इंतजार न करें। ऐसे मामलों में तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लें, क्योंकि बचपन में ही इनका सटीक और स्थायी इलाज संभव है।

​यह महत्वपूर्ण जानकारी पीजीआई के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. राजीव अग्रवाल ने होटल क्लार्क्स अवध में आयोजित ‘इंडो गल्फ क्रेनियोफेशियल सोसायटी’ की बैठक के दौरान दी।

​3D प्रिंटिंग से तैयार हो रहे कस्टमाइज्ड इंप्लांट
​डॉ. राजीव अग्रवाल ने बताया कि क्रेनियोफेशियल सर्जरी की तकनीकों में क्रांतिकारी बदलाव आए हैं। अब बच्चे के सीटी स्कैन के जरिए सिर या चेहरे की हड्डी की कमी और उसके सटीक आकार का पहले ही पता लगा लिया जाता है।
​आधुनिक तकनीक: 3D प्रिंटिंग तकनीक की मदद से मरीज की जरूरत के हिसाब से ही विशेष इंप्लांट तैयार किया जाता है।

​सटीक आकार: इससे सर्जरी के दौरान डॉक्टरों को हड्डी को सही शेप देने में काफी आसानी होती है।
​पहले की तुलना में सहूलियत: पहले शरीर के किसी दूसरे हिस्से से हड्डी काटकर प्रभावित जगह पर लगाई जाती थी, लेकिन अब कस्टमाइज्ड इंप्लांट्स ने इस प्रक्रिया को ज्यादा सुरक्षित और असरदार बना दिया है।
​शरीर में खुद घुल जाएंगे प्लेट्स और स्क्रू
​सम्मेलन में शामिल ओमान के क्रेनियोफेशियल सर्जन डॉ. एडेल अल-नागर और डॉ. तैमूर अल-बुलुशी ने बायो-रिसोर्बेबल (घुलनशील) प्लेट्स और स्क्रू के इस्तेमाल पर प्रकाश डाला।

​दोबारा सर्जरी से राहत: चुनिंदा मामलों में ऐसी प्लेट्स और स्क्रू लगाए जाते हैं जो सर्जरी के 6 महीने से 1 साल के भीतर बच्चे के शरीर में खुद-ब-खुद घुल जाते हैं।
​कोई दूसरा ऑपरेशन नहीं: इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि इन्हें बाहर निकालने के लिए बच्चे को दोबारा सर्जरी के दर्द से नहीं गुजरना पड़ता।
​मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम करती है जटिल ऑपरेशन
​विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि हर बच्चे का इलाज एक जैसा नहीं होता। मामूली विकृतियों का इलाज एंडोस्कोपी (दूरबीन) या छोटी सर्जरी से संभव है, जबकि गंभीर मामलों में ओपन सर्जरी की आवश्यकता होती है। ऐसे जटिल ऑपरेशन्स के लिए प्लास्टिक सर्जन, न्यूरोसर्जन, नेत्र रोग विशेषज्ञ, एनेस्थीसिया और आईसीयू विशेषज्ञों की एक संयुक्त टीम मिलकर काम करती है।

​26 सितंबर को डॉक्टरों को मिलेगा व्यावहारिक प्रशिक्षण
​इंडो गल्फ क्रेनियोफेशियल सोसायटी के तत्वावधान में 26 सितंबर को होटल क्लार्क्स अवध में एक विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया जाएगा। इसमें देश-विदेश के विशेषज्ञ डॉक्टर शामिल होंगे, जिन्हें मॉडल्स पर हड्डी काटने, सही आकार देने और जोड़ने की आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक अभ्यास कराया जाएगा।

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