PGI के डॉ. ज्ञान चंद को मिला इंटरनेशनल अवार्ड, रोबोटिक थायरॉयड सर्जरी शोध में मारी बाजी

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​लखनऊ। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) के वरिष्ठ एंडोक्राइन सर्जन डॉ. ज्ञान चंद ने चिकित्सा के क्षेत्र में संस्थान का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। उन्हें रोबोटिक थायरॉयड सर्जरी पर उत्कृष्ट शोध के लिए प्रतिष्ठित ‘एएमएएसई बेस्ट पेपर अवॉर्ड’ (AMASI Best Paper Award) के प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

​अमासी के 21वें सम्मेलन में मिली उपलब्धि
यह सम्मान उन्हें कोलकाता में आयोजित ‘एसोसिएशन ऑफ मिनिमल एक्सेस सर्जंस ऑफ इंडिया’ (AMASI) के 21वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रदान किया गया। सम्मेलन में देशभर और विदेश से आए विशेषज्ञों के बीच डॉ. ज्ञान चंद के शोध पत्र को सर्वश्रेष्ठ चुना गया।

​170 सर्जरी के नतीजों पर आधारित था शोध
डॉ. ज्ञान चंद ने 170 रोबोटिक थायरॉयड सर्जरी के परिणामों और आंकड़ों पर अपना गहन शोध पत्र प्रस्तुत किया था। उनके इस अध्ययन में मुख्य रूप से दो आधुनिक तकनीकों—’ट्रांसओरल’ और ‘बाइलेटरल एक्सिलो-ब्रेस्ट (BABA)’ तकनीक की कार्यप्रणाली व नतीजों की तुलना की गई थी।
​वैज्ञानिक उपयोगिता के आधार पर मिला पहला स्थान
अमासी की जूरी ने इस शोध को मरीजों के इलाज में अत्यधिक उपयोगी और चिकित्सा जगत के लिए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक योगदान माना। तकनीक की सटीकता और मरीजों के बेहतर रिकवरी रेट को देखते हुए इस प्रेजेंटेशन को प्रथम पुरस्कार के लिए चुना गया।

बताते चलें कि छह वर्षीय बच्ची की सफल रोबोटिक थायरॉयड सर्जरी कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया जा चुका है। यह भारत में अब तक की सबसे कम उम्र की मरीज है, जिसकी इस तकनीक से थायरॉयड सर्जरी की गई है। इस सर्जरी का नेतृत्व प्रो. (डॉ.) ज्ञान चंद ने किया था।

उन्होंने बताया कि विश्व स्तर पर अब तक सबसे कम उम्र की मरीज, जिसकी रोबोटिक थायरॉयड सर्जरी की गई है, पांच वर्षीय बच्ची को थायरॉयड ग्रंथि में एक गांठ के इलाज के लिए एसजीपीजीआई लाया गया था। सामान्य सर्जरी में गर्दन पर चीरा लगाना पड़ता है, लेकिन रोबोटिक सर्जरी में बगल और छाती में छोटे-छोटे चीरे लगाए जाते हैं। इससे गर्दन पर कोई निशान दिखाई नहीं देता। साथ ही, रोबोटिक तकनीक से डॉक्टरों को शरीर के अंदर का हिस्सा अधिक स्पष्ट दिखाई देता है, प्रो. (डॉ.) ज्ञान चंद ने कहा, “यह भारत में रोबोटिक एंडोक्राइन सर्जरी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। छह वर्ष की बच्ची में इस प्रकार की सर्जरी करना चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि छोटे बच्चों में विशेष योजना और तकनीकी बदलावों की आवश्यकता होती है।

उन्होंने बताया कि रोबोटिक सर्जरी का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह अधिक सटीक होती है और मरीज की गर्दन पर कोई बड़ा निशान नहीं छोड़ती। बच्चों के लिए यह एक महत्वपूर्ण लाभ है।

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