Pgi: पीडियाट्रिक न्यूरो-इंटरवेन्शन और HIFU तकनीक से बदल रही मरीजों की जिंदगी

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Pgi: पीडियाट्रिक न्यूरो-इंटरवेन्शन और HIFU तकनीक से बदल रही मरीजों की जिंदगी

​लखनऊ। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGIMS) देश में उच्चस्तरीय चिकित्सा सेवाओं (क्वाटरनरी-केयर) के एक प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी स्थिति को तेजी से मजबूत कर रहा है। संस्थान में हाल ही में आयोजित ‘इंडियन सोसाइटी ऑफ न्यूरोरेडियोलॉजी, मिड-टर्म CME 2026’ में देशभर से आए लगभग 300 विशेषज्ञों ने भाग लिया। इस दो दिवसीय सम्मेलन का मुख्य विषय “बचपन में मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं की असामान्यता” (Brain Vascular Malformation of Childhood) था। कार्यक्रम के दौरान संस्थान ने स्ट्रोक केयर, पीडियाट्रिक न्यूरो-इंटरवेन्शन और आधुनिक न्यूरोरेडियोलॉजी के क्षेत्र में अपनी बढ़ती क्षमताओं का प्रदर्शन किया।

​24 घंटे स्ट्रोक सेवा और बच्चों के लिए विशेष सुविधाएं
​एसजीपीजीआई का रेडियोडायग्नोसिस विभाग मरीजों को आपातकालीन और सटीक इलाज मुहैया कराने के लिए 24 घंटे स्ट्रोक सर्विस का संचालन कर रहा है। विभाग अब आगामी एडवांस्ड पीडियाट्रिक सेंटर के तहत बच्चों में दिमाग और नसों से जुड़ी जटिल बीमारियों के लिए विशेष न्यूरो-इंटरवेन्शनल सेवाएं विकसित कर रहा है। बच्चों में स्ट्रोक और वैस्कुलर मैलफॉर्मेशन जैसी समस्याओं के लिए बेहद सटीक इमेजिंग और न्यूनतम चीर-फाड़ वाले इलाज की आवश्यकता होती है।

​बिना चीर-फाड़ के इलाज: HIFU तकनीक का भविष्य
​विभाग की प्रमुख प्रोफ़ेसर अर्चना गुप्ता ने बताया कि संस्थान अब मरीज-केंद्रित और कम दर्दनाक तकनीकों पर ध्यान दे रहा है। भविष्य में कुछ खास स्थितियों के इलाज के लिए HIFU (हाई-इंटेंसिटी फोकस्ड अल्ट्रासाउंड) जैसी नई तकनीकों को अपनाने की योजना है। HIFU एक ऐसी नॉन-सर्जिकल विधि है जिसमें बिना कोई चीरा लगाए, केंद्रित ध्वनि तरंगों (Sound Waves) के जरिए शरीर के अंदर प्रभावित ऊतकों (Tissues) का सटीक इलाज किया जाता है।

​CME के ऑर्गनाइज़िंग प्रेसिडेंट डॉ. विवेक सिंह ने कहा कि modern neuro-intervention ने न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के इलाज का नजरिया बदल दिया है। सम्मेलन में देश के प्रतिष्ठित संस्थानों (AIIMS, PGIMER, NIMHANS, SCTIMST) के विशेषज्ञों ने मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी और कैरोटिड आर्टरी स्टेंटिंग जैसी तकनीकों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया।

​स्ट्रोक से उबर चुके बच्चे बने उम्मीद का प्रतीक
​सम्मेलन का सबसे भावनात्मक और महत्वपूर्ण पहलू स्ट्रोक के इलाज के बाद पूरी तरह स्वस्थ हो चुके बच्चों का सम्मान था। इन बच्चों की उपस्थिति ने यह संदेश दिया कि बच्चों को भी स्ट्रोक हो सकता है और इसे मेडिकल इमरजेंसी मानकर तुरंत इलाज दिया जाना बेहद आवश्यक है।
​एसजीपीजीआई के रेडियोडायग्नोसिस विभाग का मुख्य उद्देश्य अत्याधुनिक मेडिकल साइंस का लाभ आम मरीजों तक पहुँचाना है, ताकि मरीजों को नया और बेहतर जीवन मिल सके।

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