लोहिया संस्थान में विशेषज्ञ डॉक्टरों ने दी अहम जानकारी
लखनऊ। गंभीर बीमारी के कारण जब फेफड़े शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन देने में असमर्थ हो जाते हैं और वेंटिलेटर से भी मरीज की स्थिति में सुधार नहीं होता, तब ‘ईसीएमओ’ (ECMO) तकनीक मरीज की जान बचाने में बेहद कारगर साबित होती है। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के एनस्थीसिया विभाग में आयोजित एक विशेष कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने इस आधुनिक तकनीक के प्रयोग और महत्व पर विस्तार से चर्चा की।
क्या है ईसीएमओ और कैसे करती है काम?
एनस्थीसिया विभाग के अध्यक्ष डॉ. पीके दास ने बताया कि ईसीएमओ (ExtraCorporeal Membrane Oxygenation) प्रणाली में मरीज के शरीर से खून निकालकर मशीन में भेजा जाता है। यह मशीन अस्थायी रूप से फेफड़ों का काम संभालती है और कुछ मामलों में दिल के पंपिंग फंक्शन में भी मदद करती है।
मूल बीमारी का इलाज नहीं: ईसीएमओ सीधे तौर पर किसी बीमारी का इलाज नहीं करती, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य शरीर में ऑक्सीजन का स्तर और रक्त प्रवाह बनाए रखना है।
अंगों को मिलता है रिकवरी का समय: मशीन के सपोर्ट से मरीज के दिल और फेफड़ों को आराम मिलता है, जिससे डॉक्टरों को मूल बीमारी का इलाज करने का जरूरी समय मिल जाता है। स्थिति में सुधार होने पर मशीन का सपोर्ट धीरे-धीरे हटा लिया जाता है।
किन परिस्थितियों में होती है इस्तेमाल?
डॉक्टरों के अनुसार यह तकनीक बेहद चुनिंदा और गंभीर मामलों में ही प्रयोग में लाई जाती है:
गंभीर निमोनिया
फेफड़ों का अचानक फेल होना (ARDS)
गंभीर हार्ट फेल्योर
कार्डियोजेनिक शॉक
हर मरीज के लिए नहीं है ECMO: डॉ. दीपक मालवीय
लोहिया संस्थान के पूर्व निदेशक एवं एनस्थीसिया विभाग के पूर्व प्रमुख डॉ. दीपक मालवीय ने स्पष्ट किया कि ईसीएमओ का प्रयोग हर मरीज पर नहीं किया जा सकता। इसके लिए मरीज की उम्र, बीमारी की गंभीरता, अन्य अंगों की स्थिति और इलाज से सुधार की संभावनाओं का गहन आकलन किया जाता है। यह एक अत्यंत जटिल प्रक्रिया है, जिसे केवल अनुभवी विशेषज्ञों की देखरेख में आईसीयू (ICU) के भीतर ही अंजाम दिया जाता है।












