नई दिल्ली। राजधानी नई दिल्ली में एक प्रेरणादायक कार्यक्रम के दौरान लंबी दूरी के धावक और लेखक अंशुमान ठाकुर की पहली किताब ‘द मैन हू रन्स’ (The Man Who Runs) का भव्य विमोचन किया गया। यह किताब एक सामान्य व्यक्ति के एक दशक लंबे उस सफ़र को बयां करती है, जो पहला कदम उठाने से शुरू होकर सात मैराथन पूरी करने और प्रतिष्ठित बोस्टन मैराथन के लिए क्वालिफ़ाई करने की चुनौतियों तक पहुँचता है।
दौड़ने से ज़िंदगी में बदलाव का संदेश
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अंशुमान ठाकुर ने कहा, “यह किताब सिर्फ़ मैराथन दौड़ने के बारे में नहीं है, बल्कि यह उस इंसान के बनने के सफ़र के बारे में है जो खुद पर विश्वास करना सीखता है। सुबह जल्दी उठने का अनुशासन, परेशानी के बावजूद दौड़ते रहने की क्षमता और धैर्य—ये ऐसी सीख हैं जिन्हें ज़िंदगी के हर पहलू में अपनाया जा सकता है।
पेशे से HCL सॉफ़्टवेयर में कस्टमर सक्सेस डायरेक्टर अंशुमान अब तक 7 मैराथन पूरी कर चुके हैं, जिसमें उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 3 घंटे 22 मिनट रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह किताब केवल अनुभवी धावकों के लिए नहीं, बल्कि उन सभी के लिए है जो किसी भी क्षेत्र में एक नई शुरुआत करना चाहते हैं।
विशेषज्ञों और गणमान्य अतिथियों ने साझा किए विचार
किताब लॉन्च के अवसर पर खेल, चिकित्सा और कानून क्षेत्र की दिग्गज हस्तियों ने भी हिस्सा लिया:
डॉ. राजीव वर्मा (प्रमुख – जॉइंट रिप्लेसमेंट व ऑर्थोपेडिक्स, मणिपाल हॉस्पिटल): “सहनशक्ति सिर्फ़ शारीरिक ताक़त नहीं है; यह निरंतरता, धैर्य और शरीर का सम्मान करने का अनुशासन है।
बिमलेंद्र झा (पूर्व MD, जिंदल स्टील एंड पावर): “खेल में इंसान का खुद को देखने का नज़रिया बदलने की ताक़त होती है। अंशुमान की कहानी इसी बदलाव का बेहतरीन उदाहरण है।”
मनीष कुमार झा (वरिष्ठ अधिवक्ता, दिल्ली हाई कोर्ट): “कोई भी बड़ी कामयाबी एक दिन में नहीं मिलती, यह समय के साथ बार-बार की गई अनगिनत छोटी कोशिशों का परिणाम होती है।
बदलाव का एक सशक्त माध्यम
भारत में दौड़ने और एंड्योरेंस स्पोर्ट्स के प्रति बढ़ते रुझान के बीच यह किताब दृढ़ता, आत्म-खोज और कभी हार न मानने के जज्बे का जश्न मनाती है। ‘द मैन हू रन्स’ पाठकों को याद दिलाती है कि हर बड़े बदलाव की शुरुआत केवल पहला कदम उठाने के फ़ैसले से होती है।












