एक्सीडेंट में बचेगी जान: KGMU के डॉक्टरों ने खोजी इंटरनल ब्लीडिंग पकड़ने वाली खास पोर्टेबल डिवाइस ​

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• बिना स्क्रीन और रेडियोलॉजिस्ट के सेकेंडों में चलेगा इंटरनल ब्लीडिंग का पता
​• एम्बुलेंस चालक और पैरामेडिक्स भी कर सकेंगे इस्तेमाल; ‘गोल्डन ऑवर’ में साबित होगी वरदान

लखनऊ। सड़क दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से घायल मरीजों की जान बचाने की दिशा में किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) के डॉक्टरों ने बड़ी सफलता हासिल की है। KGMU के विशेषज्ञों ने एक ऐसी पोर्टेबल और स्क्रीन-फ्री हैंडहेल्ड डिवाइस विकसित की है, जो दुर्घटना के तुरंत बाद शरीर के अंदर होने वाले रक्तस्राव (इंटरनल ब्लीडिंग) का शुरुआती स्तर पर ही पता लगा लेगी।

​यह तकनीक ‘गोल्डन ऑवर’ (हादसे के बाद का पहला क्रिटिकल घंटा) के दौरान मरीजों के त्वरित इलाज में गेम-चेंजर साबित होगी।
​📌 प्रमुख विशेषताएं: क्यों खास है यह डिवाइस?
​बिना स्क्रीन और विशेषज्ञ के संचालन: इसे चलाने के लिए न तो किसी स्क्रीन की जरूरत है और न ही किसी रेडियोलॉजिस्ट या विशेषज्ञ की।
​पैरामेडिक्स भी कर सकेंगे इस्तेमाल: सामान्य प्रशिक्षण के बाद एम्बुलेंस चालक, पैरामेडिकल स्टाफ और आपातकालीन स्वास्थ्यकर्मी भी इसका आसानी से उपयोग कर सकते हैं।
​बिजली व बैटरी दोनों से संचालित: यह उपकरण बिजली के साथ-साथ बैटरी से भी चल सकता है, जिससे ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में भी कोई बाधा नहीं आएगी।

​निरंतर निगरानी (Monitoring): इलाज के दौरान मरीज के शरीर के अंदर रक्तस्राव बढ़ रहा है या रुक गया है, इसकी भी लगातार निगरानी की जा सकेगी।
​💡 कैसे काम करती है यह स्वदेशी तकनीक?
​KGMU ट्रॉमा सेंटर के सीएमएस व एनस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. प्रेमराज सिंह और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अमिया अग्रवाल ने इस डिवाइस को तैयार किया है।
​”यह डिवाइस शरीर के अंदर मौजूद तरल पदार्थ (Fluid) की जांच करती है। यदि पेट में खून या कोई असामान्य तरल जमा होने के संकेत मिलते हैं, तो यह तुरंत इसकी जानकारी दे देती है। बाहरी रक्तस्राव तो आसानी से दिख जाता है, लेकिन अंदरूनी रक्तस्राव समय पर न दिखने के कारण मरीज की जान चली जाती है। यह डिवाइस ऐसे मरीजों को समय रहते उच्च स्तरीय अस्पताल रेफर करने में मदद करेगी।”
— डॉ. प्रेमराज सिंह, सीएमएस (KGMU ट्रॉमा सेंटर)

🏥 अल्ट्रासाउंड की निर्भरता होगी खत्म
​डॉ. अमिया अग्रवाल ने बताया कि अब तक पेट में अंदरूनी रक्तस्राव का पता लगाने के लिए अल्ट्रासाउंड मशीन और रेडियोलॉजिस्ट की जरूरत पड़ती थी, जो हर सीएचसी (CHC) या जिला अस्पताल में 24 घंटे उपलब्ध नहीं होते। इस नई डिवाइस के आने से छोटे स्वास्थ्य केंद्रों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी बिना अल्ट्रासाउंड के त्वरित जांच संभव हो सकेगी।
​📜 पेटेंट के लिए आवेदन, जल्द मिलेगी अंतिम मंजूरी
​डॉक्टरों के अनुसार, इस इनोवेटिव डिवाइस के डिजाइन का पेटेंट आवेदन किया जा चुका है। अंतिम मंजूरी मिलते ही यह पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक देश की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं (Emergency Healthcare System) में एक बड़ा और क्रांतिकारी बदलाव लाएगी।

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