देवशयनी एकादशी पर बन रहे हैं कई शुभ संयोग:यह है अचूक उपाय

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​लखनऊ। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस वर्ष उदयातिथि के अनुसार देवशयनी एकादशी का व्रत 25 जुलाई को रखा जाएगा। इसी पावन तिथि से भगवान श्री हरि विष्णु अगले चार महीनों के लिए क्षीरसागर में योग निद्रा में चले जाते हैं और चातुर्मास का आरंभ होता है।
​मान्यता है कि चातुर्मास के दौरान पृथ्वी का संचालन भगवान शिव करते हैं। इसी अवधि में भोलेनाथ का प्रिय सावन का महीना भी आता है।

पौराणिक मत: इन चार महीनों में भगवान विष्णु पाताल लोक में राजा बलि के द्वार पर निवास करते हैं और इसके बाद कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवउठनी एकादशी) को पुनः लौटते हैं।

​तिथि और पारण का शुभ मुहूर्त
​स्वास्तिक ज्योतिष केन्द्र (अलीगंज, लखनऊ) के ज्योतिषाचार्य एस.एस. नागपाल के अनुसार:
​एकादशी तिथि प्रारंभ: 24 जुलाई (शुक्रवार), सुबह 09:12 बजे
​एकादशी तिथि समाप्त: 25 जुलाई (शनिवार), सुबह 11:34 बजे
​व्रत तिथि (उदयातिथि): 25 जुलाई
​व्रत पारण समय: 26 जुलाई (रविवार) प्रातः काल
​बन रहे हैं कई दुर्लभ एवं शुभ योग

​इस वर्ष देवशयनी एकादशी पर ब्रह्म योग के उपरांत इंद्र योग तथा सूर्य और उच्च के गुरु का पुष्य नक्षत्र संयोग बन रहा है। इन दुर्लभ योगों के कारण इस दिन किए जाने वाले पूजा-पाठ, जप और दान का फल कई गुना अधिक प्राप्त होगा।

​देवशयनी एकादशी की पूजन विधि
​अभिषेक व स्नान: भगवान विष्णु के विग्रह को पंचामृत से स्नान कराएं।
​श्रृंगार व पूजन: धूप-दीप जलाकर भगवान का पूजन करें।
​शयन विधान: अपनी क्षमतानुसार सोना, चाँदी या अन्य शय्या पर सुंदर बिछौना लगाएं, उस पर पीला रेशमी वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु को शयन कराएं।

चातुर्मास के चार महीनों में सभी प्रकार के मांगलिक कार्य (जैसे विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश आदि) वर्जित रहते हैं।
​दैनिक नियम: उत्तम स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए प्रतिदिन सूर्य देव को जल अर्पित करें तथा भगवान विष्णु और शिवजी के मंत्रों का जाप करें।

​सुख-समृद्धि, मानसिक शांति और कर्ज मुक्ति के अचूक उपाय
​यदि आप जीवन में सुख-शांति और आर्थिक उन्नति चाहते हैं, तो एकादशी पर ये उपाय अवश्य करें:
​विशेष अभिषेक: दक्षिणावर्ती शंख में केसर मिश्रित दूध या गंगाजल भरकर भगवान विष्णु का अभिषेक करें। इसके बाद उन्हें पीले वस्त्र, पीले फूल और पीले फल अर्पित करें।
​तुलसी पूजा: एकादशी की शाम तुलसी के पौधे के सामने गाय के घी का दीपक जलाएं। “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करते हुए तुलसी जी की 11 बार परिक्रमा करें।

​विष्णु सहस्रनाम पाठ: इस दिन ‘विष्णु सहस्रनाम’ का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
​गुरु ग्रह शांति हेतु दान: पीले रंग की वस्तुएं (जैसे चना दाल, केला, पीतल, हल्दी या पीले वस्त्र) का दान करें। इससे कुंडली में बृहस्पति मजबूत होता है और करियर/व्यापार की बाधाएं दूर होती हैं।
​पीपल वृक्ष की सेवा: सुबह के समय पीपल के वृक्ष पर जल अर्पित करें और शाम को वहां दीपक जलाकर अपनी मनोकामना कहें।

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