PGI फैकल्टी की रही मुख्य भूमिका
लखनऊ। प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य केंद्रों में स्तनपान (ब्रेस्टफीडिंग) सुरक्षा और सहायता को सुदृढ़ करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य में स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए भारत का पहला ‘फैसिलिटी-बेस्ड लैक्टेशन मैनेजमेंट (FBLM) ट्रेनिंग मॉड्यूल’ सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया है। इस विशेष मॉड्यूल को तैयार करने में संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SGPGI) की फैकल्टी ने अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
भव्य उद्घाटन और तकनीकी सहयोग
इस अभिनव ट्रेनिंग मॉड्यूल का औपचारिक उद्घाटन चिकित्सा स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष द्वारा किया गया। यह उद्घाटन ‘नेशनल हेल्थ मिशन’ (NHM) के तहत परिवार कल्याण निदेशालय द्वारा आयोजित ‘स्टेट-लेवल ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स (ToT)’ कार्यक्रम के समापन अवसर पर संपन्न हुआ। इस महत्वपूर्ण पहल को UNICEF और किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) का तकनीकी सहयोग प्राप्त हुआ है।
विशेषज्ञों की टीम और PGI का योगदान
इस उच्च स्तरीय ट्रेनिंग मॉड्यूल को नवजात शिशु की देखभाल और लैक्टेशन मैनेजमेंट (स्तनपान प्रबंधन) के शीर्ष विशेषज्ञों के संयुक्त प्रयासों से तैयार किया गया है।
इस विशेषज्ञ टीम में निम्नलिखित डॉक्टर शामिल हैं:
प्रो. एस. एन. सिंह
प्रो. शालिनी त्रिपाठी
प्रो. अनीता सिंह (नियोनेटोलॉजी विभाग, SGPGI)
प्रो. प्रतिमा आनंद
विशेष रूप से, SGPGI के नियोनेटोलॉजी विभाग की प्रो. अनीता सिंह ने इस मॉड्यूल के वैज्ञानिक लेखन, तकनीकी विकास और साक्ष्य-आधारित (एविडेंस-बेस्ड) कंटेंट को तैयार करने में केंद्रीय भूमिका निभाई। नवजात शिशु के पोषण, ह्यूमन मिल्क बैंकिंग और फैसिलिटी-बेस्ड नवजात देखभाल में अपनी विशेषज्ञता का उपयोग करते हुए उन्होंने इस प्रैक्टिकल ट्रेनिंग मटीरियल को विकसित करने में बड़ा योगदान दिया है।
छह दिवसीय प्रशिक्षण और भविष्य का खाका
यह राज्य-स्तरीय प्रशिक्षण (ToT) कार्यक्रम 29 जून से 4 जुलाई 2026 तक छह दिनों के लिए आयोजित किया गया था। इसमें पूरे उत्तर प्रदेश की 45 लैक्टेशन मैनेजमेंट यूनिट्स (LMUs) के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इसका मुख्य उद्देश्य मास्टर ट्रेनर्स का एक ऐसा मजबूत ग्रुप तैयार करना है, जो आगे चलकर अपने-अपने सेंटर्स पर अन्य स्वास्थ्य प्रदाताओं को प्रशिक्षित कर सकें।
मिशन और उद्देश्य: इस मॉड्यूल को डॉक्टरों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की क्षमता बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य स्तनपान को बढ़ावा देना, लैक्टेशन से जुड़ी आम चुनौतियों का तुरंत समाधान करना और इन्फेंट फॉर्मूला (शिशुओं के लिए डिब्बाबंद दूध) पर बढ़ती अनावश्यक निर्भरता को प्रभावी रूप से कम करना है।
उत्तर प्रदेश में माताओं और नवजात शिशुओं की सेहत से जुड़ी पहलों में इस नए और अनोखे मॉड्यूल की शुरुआत को एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है, जिससे आने वाले समय में शिशुओं के स्वास्थ्य परिणामों में व्यापक सुधार देखने को मिलेगा।










