बड़ा फैसला: केजीएमयू (KGMU) परिसर में दलालों की मनमानी और सुरक्षा में सेंधमारी को रोकने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है।
रोटेशन पॉलिसी: अब कोई भी सुरक्षा गार्ड एक साल से ज्यादा एक जगह टिक नहीं पाएगा। संवेदनशील विभागों में तैनात पुलिसकर्मियों पर भी यह नियम लागू करने की तैयारी है।
समय सीमा: वीसी डॉ. सोनिया नित्यानंद की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद फैसला, एक हफ्ते के भीतर लागू होगी नई व्यवस्था।
लखनऊ: किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) प्रशासन ने अस्पताल परिसर से दलालों का नेटवर्क पूरी तरह ध्वस्त करने और सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। अब केजीएमयू के किसी भी विभाग या चौकसी बिंदु पर कोई भी सुरक्षा गार्ड एक साल से अधिक समय तक तैनात नहीं रह सकेगा।
इसके साथ ही, लारी कार्डियोलॉजी और ट्रॉमा सेंटर जैसे बेहद संवेदनशील विभागों में तैनात पुलिसकर्मियों के लिए भी इसी तरह की ‘रोटेशन व्यवस्था’ लागू कराने की कवायद शुरू कर दी गई है।
लंबे समय तक एक जगह जमे रहने से बढ़ती है ‘मिलीभगत’
गुरुवार को कुलपति (VC) डॉ. सोनिया नित्यानंद की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में इस मुद्दे पर गंभीर मंथन हुआ। बैठक में शीर्ष अधिकारियों ने माना कि जब कोई सुरक्षाकर्मी या कर्मचारी लंबे समय तक एक ही जगह पर तैनात रहता है, तो उसकी स्थानीय बाहरी तत्वों और दलालों के साथ मिलीभगत (नेक्सस) होने की आशंका काफी बढ़ जाती है। इसी गठजोड़ को तोड़ने के लिए रोटेशन पॉलिसी का दांव खेला गया है।
एक हफ्ते में लागू होगा नया नियम, पुलिस कमिश्नर से भी संपर्क की तैयारी
केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. के.के. सिंह ने आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया:
”सुरक्षा गार्डों की नई रोटेशन व्यवस्था को अगले एक सप्ताह के भीतर धरातल पर लागू कर दिया जाएगा। इसके अलावा, केजीएमयू परिसर और चौकियों पर तैनात पुलिसकर्मियों के नियमित ट्रांसफर के लिए जल्द ही पुलिस आयुक्त (Police Commissioner) से मुलाकात कर अनुरोध किया जाएगा।”
ट्रॉमा सेंटर और लारी कार्डियोलॉजी निशाने पर; मरीजों को मिलेगी राहत
बता दें कि केजीएमयू के लारी कार्डियोलॉजी, ट्रॉमा सेंटर और ओपीडी जैसे प्रमुख विभागों में रोजाना हजारों की संख्या में गंभीर मरीज आते हैं। इस भारी भीड़ का फायदा उठाकर कुछ सक्रिय दलाल मरीजों और उनके तीमारदारों को बहला-फुसलाकर निजी मेडिकल स्टोरों और प्राइवेट जांच केंद्रों पर ले जाते हैं।
कई बार इस कमीशनखोरी के चक्कर में तीमारदारों और दलालों के बीच हिंसक झड़पें और मारपीट की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं।
पोर्टल व्यू: प्रशासन के इस कदम से जहां एक तरफ दलालों की रीढ़ टूटेगी, वहीं दूसरी तरफ दूर-दराज से आने वाले गरीब मरीजों को इलाज के लिए अधिक सुरक्षित, भयमुक्त और पारदर्शी माहौल मिल सकेगा।












