लखनऊ: किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के फिजियोलॉजी विभाग के एक वरिष्ठ प्रोफेसर पर लगे निजी प्रैक्टिस के आरोपों की जांच अब तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश मेडिकल काउंसिल और जन भवन प्रशासन की सख्ती के बाद, केजीएमयू कुलसचिव द्वारा गठित पांच सदस्यीय जांच कमेटी ने इस मामले में अपनी पहली अहम बैठक की।
कमेटी के सामने पेश हुए आरोपी प्रोफेसर से करीब 45 मिनट तक कड़ी पूछताछ की गई, जिसमें उनसे एक-एक कर 25 से अधिक सवाल पूछे गए।
साक्ष्य देखकर असहज हुए प्रोफेसर, आरोपों से किया इनकार
सूत्रों के मुताबिक, निजी प्रैक्टिस से जुड़े तीखे सवालों का सामना करते समय प्रोफेसर कई बार असहज नजर आए। कमेटी ने उनके सामने शिकायतकर्ता द्वारा सौंपे गए साक्ष्य भी रखे।
जिनमें निम्नलिखित दस्तावेज शामिल थे:
मरीजों के पर्चे और जांच रिपोर्ट
निजी क्लिनिक से जुड़ी फोटोग्राफ्स
अन्य संदेहास्पद दस्तावेज
जब कमेटी के सदस्यों ने इन पुख्ता सबूतों पर उनका जवाब मांगा, तो प्रोफेसर ने इन्हें स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने फोटो और पर्चों को लेकर अपनी सफाई पेश की, जिसके बाद कमेटी ने उनका लिखित बयान दर्ज कर लिया।
अब शिकायतकर्ता की बारी, मांगे गए वीडियो सबूत
जांच कमेटी अब इस मामले की अगली कड़ी में शिकायतकर्ता का पक्ष सुनेगी। कमेटी ने शिकायतकर्ता को पत्र भेजकर बयान दर्ज कराने और आरोपों को साबित करने के लिए अतिरिक्त साक्ष्य उपलब्ध कराने को कहा है।
बड़ी मांग: कमेटी ने शिकायतकर्ता से निजी प्रैक्टिस से जुड़े वीडियो व अन्य पुख्ता प्रमाण मांगे हैं। शिकायतकर्ता का जवाब और नए सबूत मिलने के बाद कमेटी अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करेगी।












