पांच सदस्यीय जांच कमेटी गठित
लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के फिजियोलॉजी विभाग के एक वरिष्ठ प्रोफेसर की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। नियमों के उल्लंघन और निजी प्रैक्टिस (प्राइवेट प्रैक्टिस) करने के गंभीर आरोपों के बाद केजीएमयू प्रशासन ने मामले को संज्ञान में लेते हुए एक उच्च स्तरीय पांच सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया है।
इस मामले में आरोपी प्रोफेसर को 30 जून को दोपहर 3:00 बजे कुलपति कार्यालय में समिति के समक्ष पेश होकर अपना पक्ष रखने और साक्ष्य प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
🚨 राजभवन और मेडिकल काउंसिल तक पहुंचा मामला
आईआईएम रोड निवासी शिकायतकर्ता फतेह बहादुर सिंह ने इस मामले की शिकायत मेडिकल काउंसिल ऑफ यूपी और राजभवन में दर्ज कराई थी।
कड़ा रुख: राजभवन के स्पेशल ड्यूटी ऑफिसर पंकज एल जानी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसके गहन जांच के आदेश जारी किए।
नियमों का उल्लंघन: उत्तर प्रदेश मेडिकल काउंसिल के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी के पत्र और राजभवन के निर्देशों के बाद केजीएमयू प्रशासन हरकत में आया और कुलपति की अनुमति से नोटिस जारी किया गया।
क्या है आरोप?
शिकायतकर्ता के अनुसार, प्रोफेसर द्वारा की जा रही निजी प्रैक्टिस और अन्य गतिविधियां ‘केजीएमयू एक्ट’ और विश्वविद्यालय के अनुशासन नियमों के पूरी तरह विपरीत हैं। संस्थान के डॉक्टरों से मरीजों के हित और निर्धारित नियमों के पालन की अपेक्षा की जाती है, ऐसे में ये आरोप बेहद गंभीर हैं।
👥 ये हैं 5 सदस्यीय जांच कमेटी के सदस्य
जांच समिति शिकायत से जुड़े सभी तथ्यों, दस्तावेजों और बयानों के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी।
इस हाई-प्रोफाइल कमेटी में निम्नलिखित सदस्यों को शामिल किया गया है:
प्रतिकुलपति (कुलपति द्वारा नामित अध्यक्ष)
डीन एकेडमिक्स
डीन पैरामेडिकल
चीफ प्रॉक्टर
फैकल्टी इंचार्ज (लीगल सेल)
🗓️ 30 जून को होगी अहम बैठक
कमेटी की यह महत्वपूर्ण बैठक 30 जून को कुलपति कार्यालय में होने जा रही है। नोटिस के मुताबिक, आरोपी प्रोफेसर को न केवल समिति के सामने उपस्थित होना होगा, बल्कि खुद को निर्दोष साबित करने के लिए आरोपों से जुड़े जरूरी दस्तावेज और सबूत भी पेश करने होंगे। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह केजीएमयू की कार्यप्रणाली और अनुशासन व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर सकता है।












