उत्तर भारत में अंग प्रत्यारोपण व्यवस्था को मजबूत बनाने के साथ चलेगा जागरूकता अभियान

0
80

लखनऊ।ROTTO (नॉर्थ), PGIMER, चंडीगढ़ में अस्पताल प्रशासन विभाग, PGIMER के सहयोग से “समर्थन 2026 – अंगदान: जीवन के पार जीने का वादा” शीर्षक पर 14 मार्च को एक CME‑cum‑ वर्कशॉप का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य अंगदान, नीति‑निर्माण, जनजागरूकता तथा प्रत्यारोपण व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने के लिए उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों के विशेषज्ञों को एक साझा मंच पर लाना था।

कार्यक्रम का उद्घाटन डॉ. विपिन कौशल, मेडिकल सुपरिन्टेंडेंट, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन, PGIMER तथा नोडल ऑफिसर ROTTO (नॉर्थ); डॉ. अमरजीत कौर, सीनियर रीजनल डायरेक्टर, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, चंडीगढ़; डॉ. अनिल कुमार, डायरेक्टर, NOTTO; तथा डॉ. विवेक लाल, डायरेक्टर, PGIMER, चंडीगढ़ द्वारा किया गया। उद्घाटन सत्र में अंगदाताओं के परिजनों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया, जिनके निस्वार्थ निर्णय ने अनेक रोगियों को नया जीवन प्रदान किया है। समर्थन 2026 के दौरान यह रेखांकित किया गया कि राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण कार्यक्रम के अंतर्गत प्रगति के बावजूद क्षेत्रों के बीच असमानताएँ, अवसंरचनात्मक चुनौतियाँ और जागरूकता की कमी अब भी मौजूद हैं।

इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम का लक्ष्य डिजिटल एडवोकेसी, जनविश्वास निर्माण, नीति‑समर्थन और संस्थागत सहयोग के माध्यम से मृतक अंगदान को गति देना और उसे टिकाऊ रूप से आगे बढ़ाना था। उत्तर भारत के विभिन्न SOTTO जैसे उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा तथा जम्मू‑कश्मीर ने इस कार्यशाला में सक्रिय भागीदारी दर्ज की। SOTTO उत्तर प्रदेश की ओर से संयुक्त निदेशक डॉ. राजेश हर्षवर्धन, डॉ. क्रिस अग्रवाल तथा श्री भोलेश्वर पाठक, MSSO कोऑर्डिनेटर ने समर्थन 2026 में सहभागिता की। डॉ. हर्षवर्धन ने इस अवसर पर दो महत्त्वपूर्ण व्याख्यान दिए। उन्होंने बताया कि SGPGIMS, लखनऊ में लगभग 20 वर्ष बाद फरवरी 2026 में पहला सफल कैडेवरिक अंगदान संभव हो सका, जो वर्ष 2020 में SOTTO उत्तर प्रदेश की स्थापना के बाद से किए जा रहे निरंतर प्रयासों, अनिवार्य ब्रेन‑स्टेम‑डेथ घोषणा तथा लगभग 38 ऐसे मामलों की काउंसलिंग के परिणामस्वरूप संभव हुआ।

डॉ. हर्षवर्धन ने नीति की अवधारणा पर विस्तार से प्रकाश डाला और समझाया कि किसी भी नीति की यात्रा प्रायः एक छोटे से अभियान से शुरू होती है, जो आगे चलकर व्यक्तियों और स्वयंसेवी संगठनों की सतत एडवोकेसी के माध्यम से मजबूत होकर औपचारिक नीति के रूप में आकार लेती है। उन्होंने उदाहरण दिया कि भारत ने कैसे HIV/AIDS के खिलाफ लड़ाई, पल्स पोलियो अभियान तथा कोविड‑19 से जंग में जन‑एडवोकेसी और प्रभावी नीतिगत हस्तक्षेपों के जरिए उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की। इसी क्रम में उन्होंने यह संदेश दिया कि अंगदान जन जागरूकता अभियान को भी इसी स्तर की राष्ट्रीय मुहिम के रूप में आगे बढ़ाना होगा। SOTTO उत्तर प्रदेश की टीम ने राज्य में अंगदान एवं प्रत्यारोपण को बढ़ावा देने के लिए किए गए नवाचारों और पहलों की विस्तृत जानकारी भी प्रस्थापित की। इन प्रयासों और उपलब्धियों की सराहना करते हुए समर्थन 2026 के दौरान डॉ. राजेश हर्षवर्धन को सम्मानित किया गया।

Previous articleराजन वर्मा डब्बू मेमोरियल टी20 की रोमांचक शुरुआत

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here