लखनऊ। संजय गांधी पीजीआई के हेड और नैक सर्जरी विभाग ने विभागाध्यक्ष प्रो. अमित केशरी के नेतृत्व में दो दिवसीय प्रथम कॉक्लियर इम्प्लांट कार्यशाला का आयोजन किया।
कार्यशाला में विभिन्न मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों के 20 सर्जनों ने टेम्पोरल बोन का विच्छेदन किया, जो शल्य चिकित्सा कौशल को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रोबोटिक 3डी डिजिटल माइक्रोस्कोप का उपयोग करके विच्छेदन का प्रदर्शन था, जो भारत में अपनी तरह का पहला आयोजन है।
पीजीआई के निदेशक पद्मश्री प्रो. आर.के. धीमन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। अपने संबोधन में डॉ. धीमन ने इस बात पर जोर दिया कि भारत में लगभग 63 लाख लोग श्रवण हानि से पीड़ित हैं, जिससे यह एक गंभीर जन स्वास्थ्य समस्या बन गई है। कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी इन लोगों को नया जीवन प्रदान करती है।
उन्होंने कहा कि राज्य भर के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों में कॉक्लियर इम्प्लांट कार्यक्रम शुरू करने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि एसजीपीजीआई प्रदेश राज्य में कॉक्लियर इम्प्लांट कार्यक्रम को मजबूत करने के लिए इन संस्थानों को मार्गदर्शन और प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए तत्पर है। उन्होंने बताया कि संस्थान प्रशासन उत्तर प्रदेश में बच्चों में श्रवण हानि की इस गंभीर समस्या के लिए क्षमता निर्माण हेतु सभी आवश्यक सहायता प्रदान करने के लिए तत्पर है। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रो. देवेंद्र गुप्ता भी इस अवसर पर उपस्थित थे। उन्होंने विभाग द्वारा किए जा रहे अथक प्रयासों की सराहना की और संस्थान में कॉक्लियर इम्प्लांट कार्यक्रम को और मजबूत बनाने के लिए आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की।
अपने संबोधन में प्रो. अमित केशरी ने बताया कि एसजीपीजीआई के हेड व नैक सर्जरी विभाग में बच्चों और वयस्कों दोनों पर नियमित रूप से कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी की जा रही है। कार्यशाला में सर्जनों, ऑडियोलॉजिस्टों और पुनर्वास विशेषज्ञों के व्याख्यान भी शामिल थे, जिन्होंने कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी के विभिन्न पहलुओं का व्यापक अवलोकन प्रदान किया।














