kgmu: बोन मैरो ट्रांसप्लांट जल्दी होगा शुरू

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वरिष्ठ रुधिर रोग विशेषज्ञ प्रो एम बी अग्रवाल, प्रो टी. के. दत्ता और प्रो रेनू सक्सेना लाइफ टाइम अचीवमेंट से सम्मानित

लखनऊ। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में निरंतर परिवर्तन हो रहे है। रिसर्च से जटिल बीमारियों का इलाज के साथ नये संसाधन अपडेट हो रहे है। इससे गंभीर बीमारियों का इलाज आसान हो रहा है। प्रदेश सरकार लगातार स्वास्थ्य क्षेत्र में अत्याधुनिक संसाधन से अस्पतालों को मुहैया करा रही है ताकि जटिल बीमारियों का इलाज प्रत्येक जनपद में आसानी से मरीज को मिल सके।
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक शुक्रवार की शाम को हेमेटोलॉजी ग्रुप (यूपीएचजी) के हॉलिडे इन में इंडियन सोसाइटी ऑफ हेमेटोलॉजी एंड ब्लड ट्रांसफ्यूजन (आईएसएचबीटी) के 66 वें वार्षिक सम्मेलन, हेमेटोकॉन 2025 का सम्मेलन का उद्घाटन कर रहे थे। संभल सम्मेलन में कुलपति सोनिया नित्यानंद ने कहा केजीएमयू में जल्द ही ब्लड कैंसर मरीजों के लिए बोन मैरो ट्रांसप्लांट शुरू होने जा रहा है।

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सम्मेलन में केजीएमयू कु लपति पद्मश्री डॉ. सोनिया नित्यानंद और क्लिनिकल हेमेटोलॉजी, केजीएमयू के पूर्व प्रमुख प्रो. ए.के. त्रिपाठी मौजूद थे। भारत के तीन वरिष्ठ रुधिर रोग विशेषज्ञ प्रो एम बी अग्रवाल, प्रो टी. के. दत्ता और प्रो रेनू सक्सेना को रुधिर विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए लाइफ टाइम अचीवमेंट से सम्मानित किया गया। सम्मेलन में 350 से अधिक राष्ट्रीय संकायों ने भाग लिया।

कार्यक्रम में प्रिंसेस मारिट कैंसर सेंटर टोरंटो के डॉ. ऑरो विश्वबंद्या ने मायलोडिस्प्लास्टिक सिंड्रोम (एमडीएस) के प्रबंधन पर कहा कि रक्त कैंसर का एक प्रकार है जिसका प्रबंधन करना मुश्किल है। अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण एकमात्र उपचारात्मक विकल्प है। अन्य विकल्प ब्लास्ट नियंत्रण के लिए कीमोथेरेपी है और रोगी को अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण के लिए उपयुक्त बनाना है। जो लोग बहुत बुजुर्ग हैं और प्रत्यारोपण संबंधी विषाक्तता को बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं। उन्हें अकेले या अन्य दवाओं के संयोजन में डीमेथिलेटिंग एजेंट दिए जाने चाहिए। हालांकि प्रत्यारोपण के बिना उच्च जोखिम वाले एमडीएस के परिणाम निराशाजनक हैं। कई उपचार विकल्प विकसित हो रहे हैं और प्रतिरक्षी अल्पता विकारों के लिए प्रत्यारोपण ही उपचारात्मक विकल्प बना हुआ है।

डॉ. तपन सैकिया ने कहा कि मल्टीपल मायलोमा रक्त कैंसर है। उन्होंने मल्टीपल मायलोमा उपचार प्रतिक्रिया मूल्यांकन में अस्थि मज्जा एमआरडी (मापनीय अवशिष्ट रोग) के आकलन की आवश्यकता पर बात की। वर्तमान में मल्टीपल मायलोमा के अधिकांश रोगियों में क्वाड्डुपलेट (4 दवाओं का संयोजन) उपचार का उपयोग किया जा रहा है।

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