माइक्रोबॉयोलॉजिस्ट – एपिडेमोलॉजिस्ट की सेवाएं समाप्त

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– एनएचएम ने इसी माह जून में सेवाएं समाप्त होने का दिया आदेश

– सीएमओ ज​रिए सभी का फिर से रिनीवल बढ़ाए जाने का भेजा पत्र

लखनऊ। कोविड के दौरान तैनात माइक्रोबायोलॉजिस्ट-एपिडेमोलॉजिस्ट विशेषज्ञों की सेवा एन एच एम ने समाप्त करने का निर्णय लिया है।

एनएचएम में इन सभी को अलग-अलग जनपदों में कोरोना काल में तैनात किया गया। इनकी सेवाएं कोविड जांच में ली जा रही थीं ,फिर इनकी तैनाती
माइक्रोबायोलॉजी लैब में ली जाने लगी। सीएमओ के अधीन एक माइक्रोबायोलॉजिस्ट व
एपिडेमोलॉजिस्ट विशेषज्ञ तैनात हैं। इनके जरिए जिले में होने वाली संक्रामक बीमारियों की
जांच व नमूने लेने का काम हो रहा था। एनएचएम ने अब इन्हें सेवा विस्तार देने से मना कर
दिया है। जून माह में सभी की सेवाएं समाप्त किए जाने का फैसला लिया है। सभी की सेवाएं
खत्म होने के बाद जांच व मॉनीटरिंग का बड़ा संकट खड़ा होगा। विभाग जरिए सेवा विस्तार
दिए जाने के लिए पत्र एनएचएम को भेजा है।

कोविड दौरान एनएचएम जरिए जिले में 44 स्टाफ को तैनात किया था। इसमें दो
माइक्रोबायोलॉजिस्ट व एक एपिडेमोलॉजिस्ट समेत अन्य स्टॉफ तैनात किए गए थे। इसमें एक
माइक्रोबायोलॉजिस्ट बलरामपुर अस्पताल की माइक्रोबायोलाॅजी लैब में तैनात हैं। ​जिनके
जरिए हर दिन जांच की जा रही है। माइक्रोबाॅयोला​स्टि न होने से लैब संचालन पर संकट
खड़ा होगा। इसकी वजह यह है अस्पताल में कोई भी दूसरा माइक्रोबॉयोलाजिस्ट तैनात नहीं
है। इसी तरह सीएमओ के अधीन तैनात माइक्रोबाॅयोलॉजिस्ट व एपिडेमोलॉजिस्ट जरिए संक्रामक
रोग की रोकथाम के लिए सैपलिंग कलेक्शन संग संक्रामक बीमारियों का डेटा जुटा रहे हैं।

सीएमओ के अधीन भी इकलौते माइक्रोबाॅयोलॉजिस्ट व एपिडेमोलॉजिस्ट के हटने बाद यहां पर
संकट खड़ा होगा। एनएचएम ने 30 जून तक सभी की सेवाएं समाप्त किए जाने का आदेश जारी
किया है। इसे लेकर काफी आक्रोश है। सीएमओ जरिए एनएचएम को पत्र भेजकर सेवा विस्तार
दिए जाने को पत्र भेजा गया है। सीएमओ डॉ. मनोज के मुताबिक, एनएचएम को पत्र भेजा गया
है। हालांकि अभी तक कोई जवाब नहीं आया है।

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