पायलोनिडल तकनीक सर्जरी से नहीं रहेगा सिस्ट

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पीजीआई
प्लास्टिक सर्जरी विभाग का दावा कोई आैर चिकित्सा संस्थान नहीं कर रहा है इस तकनीक से सर्जरी

 

 

 

 

लखनऊ। पीजीआई के प्लास्टिक सर्जरी विभाग ने लेजर टेक्नीक आफ पायलोनिडल तकनीक से सर्जरी कर दोबारा गांठ (सिस्ट) की संभावना को लगभग समाप्त कर दिया है। विभाग प्रमुख एवं प्लास्टिक सर्जन प्रो. राजीव अग्रवाल का दावा है कि इस तकनीक से पायलोनिडल सर्जरी पहली बार संस्थान में की गयी है। प्रदेश में किसी भी चिकित्सा संस्थान में इस तकनीक से सर्जरी नहीं कर रहा है।

 

 

प्रो. राजीव ने बताया कि पायलोनिडल तकनीक में पहले लेजर बीम से फोड़े की सतह को क्लियर किया जाता है, इसके बाद अंदर जहां से फोड़े बनना शुरू हो रहा होता है, वहां पर लेजर बीम डाल कर पूरे कोशिकाओं को जला देते है, इससे बेकार मांसपेशियां समाप्त हो जाती है। इस प्रक्रिया में सामान्य एनेस्थीसिया दी जाती है। गांठ ( सिस्ट) से बाल निकालते है यदि एक से अधिक छिद्र हैं, तो प्रत्येक को साफ कर दिया जाता है। पायलोनिडल साइनस को साफ करने और बंद करने के इस तरीके से पारंपरिक सर्जिकल इलाज की अपेक्षा बेहतर दीर्घकालिक परिणाम मिलते हैं। लेजर इलाज के बाद पिलोनिडल सिस्ट की दोबारा होने की आशंका 2.9 प्रतिशत से भी कम है। लेजर इलाज में पारंपरिक इलाजों की तुलना में कम रिकवरी समय की आवश्यकता होती है, और पोस्ट-ऑपरेटिव पेन और अस्पताल में रहने दोनों कम हो जाते हैं।

 

 

 

 

 

 

 

पायलोनियल सिस्ट की इससे बढ़ती है आशंका

-व्यक्तिगत या पारिवारिक इतिहास जैसे कि मुंहासे, फोड़े, कार्बनकल्स, फॉलिकुलाइटिस और सिबेसियस सिस्ट
– क्षेत्र में बड़ी मात्रा में बाल
– साइकिल चलाना या घुड़सवारी
– देर तक बैठे रहना
– मोटापा

लक्षण
रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से और मलद्वार के ऊपर दर्द सूजन, जो आपके टेलबोन के ठीक ऊपर का क्षेत्र है
-उस जगह से दुर्गंध या मवाद निकलना

यह है बचाव के तरीके
– क्षेत्र को साफ और सूखा रखें।
– सख्त सतहों पर लंबे समय तक बैठने से बचें।
क्षेत्र से बाल हटा दें।

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