यह लक्षण दिख रहे हो…हो सकता है हेपेटाइटिस

0
793

 

 

 

 

 

 

लखनऊ ।हेपेटाइटिस ऐसा रोग है, जिससे डरने की आवश्यकता नहीं है,सिर्फ इसके प्रति जागरूक रहना जरूरी है। एसजीपीजीआई के निदेशक एवं हेप्टोबेलोयरी के प्रोफेसर  डा आर के धीमन बताते हैं कि हेपेटाइटिस के प्रति जागरूकता के अभाव में अनेक गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

 

 

 

 

प्रो धीमान बताते हैं कि हेपेटाइटिस एक लिवर संक्रमण है जो हेपेटाइटिस  वायरस के कारण होता है। इस रोग से बचाव और उपचार दोनों संभव हैं,लेकिन लापरवाही बरतने की स्थिति में ये रोग जानलेवा हो सकता है।
यह रोग सामान्य उपचार से भी ठीक हो जाता है लेकिन कभी ‘सिरोसिस’ या कैंसर जैसे गंभीर लिवर रोगों में भी परिवर्तित हो जाता है। हेपेटाइटिस वायरस दुनिया में हेपेटाइटिस का सबसे आम कारण है, लेकिन अन्य संक्रमण, विषाक्त पदार्थ (जैसे शराब, कुछ दवाएं), और ऑटोइम्यून रोग भी हेपेटाइटिस का कारण बन सकते हैं।
पांच मुख्य हेपेटाइटिस वायरस हैं, जिन्हें ए, बी, सी, डी और ई प्रकार के रूप में जाना जाता है।हेपेटाइटिस बी और सी करोड़ों लोगों में रोग का कारण बनते हैं और एक साथ ये लिवर सिरोसिस और कैंसर का सबसे आम कारण हैं।उन्होंने ने बताया कि हेपेटाइटिस ए और ई आमतौर पर दूषित भोजन या पानी पीने के कारण होते हैं। ये वायरस दूषित रक्त व दूषित इंजेक्शन लगाने जैसी चिकित्सा प्रक्रिया से भी शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। जन्म के समय मां से बच्चे में हेपेटाइटिस तथा संक्रमित व्यक्ति से यौन संपर्क द्वारा भी यह संक्रमण होता है।हेपेटाइटिस बी के लक्षण हल्के से लेकर गंभीर तक होते हैं। वे आमतौर पर संक्रमित होने के लगभग एक से चार महीने बाद दिखाई देते हैं, हालांकि ये लक्षण जल्दी से जल्दी दो सप्ताह के संक्रमण के बाद देखे जा सकते हैं। कुछ लोगों में , आमतौर पर छोटे बच्चों में, कोई लक्षण नजर नहीं आते।हेपेटाइटिस के कुछ लक्षण पेट दर्द,पीला मूत्र,बुखार,जोड़ों का दर्द,भूख न लगना,मतली व उल्टी,कमजोरी और थकान और

 

 

 

 

 

 

त्वचा का पीला पड़ना और आँखों का सफेद होना (पीलिया) हेपेटाइटिस बी संक्रमण हेपेटाइटिस बी वायरस  के कारण होता है। वायरस रक्त, वीर्य या शरीर के अन्य तरल पदार्थों के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को चला जाता है। यह छींकने या खांसने से नहीं फैलता है।संक्रमित व्यक्ति के साथ असुरक्षित यौन संबंध रखने पर हेपेटाइटिस बी हो सकता है। यदि संक्रमित व्यक्ति का रक्त, लार, वीर्य या योनि स्राव किसी अन्य व्यक्ति के शरीर में प्रवेश करता है, तो वायरस उसके पास जा सकता है।
यह रोग संक्रमित रक्त से दूषित सुइयों और सीरिंज के माध्यम से फैलता है।

 

 

 

 

 

 

किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के गैस्ट्रोएन्ट्रोलाजी के प्रमुख डाक्टर सुमित रूगटा के अनुसार हेपेटाइटिस रोग के उपचार के लिए अनेक एंटीवायरल दवाइयां उपलब्ध हैं। इसके अतिरिक्त रोगी के आराम करने,उल्टी के उचित चिकित्सा प्रबंधन और हाई कैलोरी भोजन व तरल पेय पदार्थ के सेवन तथा शराब व कुछ विशिष्ट दवाइयों के सेवन से बचने से भी हेपेटाइटिस के रोगी को राहत मिलती है।

Previous articleगंदा पानी पीने से सौ बीमार, नौ की हालत गंभीर
Next articleफाइलेरिया का होगा उच्चस्तरीय इलाज,केरल के डाक्टर करेंगे मदद

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here