लखनऊ। अब खर्राटा आपकों परेशान नहीं कर सकेगा। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के डेंटल यूनिट ने इस प्रकार के मरीजों के लिए और सटीक उपकरण तैयार किया है। दंत संकाय के प्रोस्थोडॉन्टिक्स विभाग में खर्राटे की बीमारी से परेशान लोगों के लिए जबड़े की माप का पीसीपीडी उपकरण तैयार किया है। सटीक माप लेने के बाद मेंडिबुलर एडवांसमेंट डिवाइस तैयार होगी। फिर मरीज को बीमारी के अनुसार सटीक डिवाइस तैयार होगी। इस उपकरण का विभाग के नाम का पेटेंट करा लिया गया है।
बदलती लाइफ में खर्राटे से परेशान लोगों की दिक्कतें भी बढ़ रही हैं। खर्राटा रोकने के लिए डाक्टर से परामर्श व इलाज कराया करते है। इन दिक्कतों के निजात के लिए डेंटल यूनिट में प्रोस्थोडॉन्टिक्स विभाग के प्रमुख डॉ. पूरन चन्द ने बताया कि मोटे लोगों में खर्राटा तेज लेने की समस्या तेजी से पनपती है। उन्होंने बताया कि जिन लोगों की गर्दन 17 इंच से अधिक मोटी होती है, उनमें समस्या का खतरा अधिक रहता है। क्लीनिकल साइंस में इस बीमारी को स्लीप एप्निया कहते हैं। इसमें मरीज को ठीक से नींद नहीं आती है।
रात में सोते वक्त मरीज खर्राटे ज्यादा आैर तेज लेता हैं। अचानक सांस रुकने से मरीज एकाएक जग जाता है। उन्होंने बताया कि नींद पूरी न होने से मरीज को दिन में सुस्ती रहती है। वाहन चलाते के वक्त भी नींद आती है, जिससे एक्सीडेंट होने की आशंका ज्यादा रहती है।

डॉ. पूरन चन्द ने बताया कि अच्छी नींद न आने से मरीज को डायबिटीज के अलावा कार्डियक बीमारी आैर इससे जुड़ी अन्य बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। मरीज के सांस की नली सोते वक्त सकरी हो जाती है। इससे मरीज की नींद बीच में टूट जाती है। सांस रुकने से मरीज की जान को खतरा हो सकता है। ऐसे मरीजों मुंह में खास तरह का मेंडिबुलर एडवांसमेंट डिवाइस लगाई जाती है। मरीज को यह मशीन सोते के वक्त लगानी होती है। मरीज के नीचे वाला जबड़ा मशीन लगाने के बाद आगे की तरफ आ जाता है, लेकिन जबड़ा कितना आगे करना है, इसके लिए सटीक माप लेना आवश्यक है। जबड़ा ज्यादा आगे होने पर मरीज को दर्द होने लगता है। इससे डिवाइस सही से काम नहीं करती थी। उन्होंने बताया कि खास उपकरण तैयार किया गया है।
इससे मरीज के जबड़े की सटीक माप ली जाती है। इसे पीसीपीडी डिवाइस का नाम दिया गया है। यह मुंह में रखते ही जबड़े का सटीक माप ले सकेगी।
डॉ. पूरन चंद ने बताया कि पीसीपीडी का पेटेंट हो गया है। जल्द ही इसके निर्माण के लिए कंपनी से करार किये जाने की बात चीत चल रही है। इसमें टेक्नोलॉजी हस्तानांतरित की जाएगी। ताकि कंपनी पीसीपीडी का उत्पादन कर सके।












