लखनऊ । प्रिवेंटेबल विजन लॉस (दृष्टिहीनता) के मरीज लगातार बढ़ रहे है। सर्वे के मुताबिक संभावित दृष्टिहीनता का शिकार होने वालों की संख्या चिन्ताजनक है और इससे भी बड़ी चिन्ता यह है कि जिन कारणों से यह सब होता है, उनका पता आमतौर पर नहीं किया जाता है। यह सर्वे नेशनल ब्लाइंडनेस एंड विजुअल इंपेयरमेंट सर्वे इंडिया 2015-19 के अनुसार 50 साल से ऊपर की आयु के 1.99 भारतीय दृष्टिहीनता के शिकार हैं।
वल्र्ड साइट डे 14 अक्टूबर को मनाया जाता है। यह रेटिनल बीमारियों के बारे में जागरूक किया जाता है। इस साल का थीम है, ‘ लव योर आईज’ (अपनी आंखों से प्रेम कीजिए)। इससे आखों की आवश्यक देखभाल की महत्ता पुर्नस्थापित होती है। लोगों को जागरूक किया जाता है कि आंखों की नियमित जांच कराना चाहिए है।
केजीएमयू के आई बैंक प्रमुख डा. अरुण शर्मा का कहना है कि मोतियाबिन्द जैसे कारण हैं, जो कि 50 साल या उससे ज्यादा के 66.2 लोगों में दृष्टिहीनता के लिए जिम्मेदार हैं। इसके अलावा ग्लूकोमा (ऑप्टिक नर्व को नुकसान) या रेटिनल बीमारी जैसे उम्र से संबंधित मैकुलर डीजेनरेशन (एएमडी) और डायबिटीक मैकुलर एडिमा (डीएमई) जो व्यक्ति की आंखों के पिछले हिस्से में टिश्यू की परत को प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि बीमारी का जल्दी पता लग जाए और समय पर उपचार किया जा सकता है। इसके अलावा, ग्लूकोमा 60 साल और ज्यादा के लोगों में दृष्टिहीनता के अग्रणी कारणों में एक है।
नेत्र रोग विशेषज्ञ डा. शोभित का कहना है कि डीएमई डायबिटिक रेटिनोथेरैपी की एक जटिलता है जो आंखों के पिछले हिस्से (रेटिना) को प्रभावित करता है। अनुमान है कि 2040 तक भारत में डायबिटीक मामलों की संख्या दुनिया भर में दूसरे नंबर पर होगी। यह बुजुर्गों में दृष्टिहीनता के मुख्य कारणों में एक है। अन्य बीमारियां जैसे ग्लूकोमा और मोतियाबिन्द उम्र के साथ बढ़ती या खराब होती है। ग्लूकोमा को अक्सर नजरअंदाज किया जाता है और अच्छा खासा नुकसान हो जाने के बाद ही इस पर ध्यान दिया जाता है। अगर आपके परिवार में ग्लूकोमा की हिस्ट्री रही हो या आपकी उम्र 40 पार है ,तो जोखिम का खतरा ज्यादा हैं।
दृष्टिहीनता रोकने के लिए इसके इलाज के कई विकल्प उपलब्ध हैं, जिससे बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है। इन विकल्प में लेजर फोटो कोएगुलेशन, एंटी-वीईजीएफ (वैस्कुलर एंडोथेलियल ग्रोथ फैक्टर) इंजेक्शन, सर्जरी और कांबिनेशन थेरैपी तथा इनमें लेजर और वीईजीएफ उपचार शामिल है।












