लखनऊ। मंगलवार को राजधानी में कोरोना संक्रमण 1154 आंकड़ा पहुंचा। यह आंकड़ा लगभग 1 महीने के बाद पहुंचा है। पिछले हफ्ते तक लगातार पुराना संक्रमण का आंकड़ा 2000 के ऊपर ही टिका हुआ था। इसी प्रकार डिस्चार्ज होने वाले मरीजों की संख्या 3229 रही। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का मानना है कि ठीक होने वाले मरीजों की संख्या अब लगातार बढ़ना चाहिए। राजधानी में संक्रमण पिछले दिनों की अपेक्षा धीमा हो रहा है। वही आज संक्रमण से मरने वाले मरीजों की संख्या 23 रही। कोरोना संक्रमण के चलते राजधानी में लगातार बिस्तरों की संख्या में इजाफा किया जा रहा है। ज्यादातर नये अस्पताल आईसीयू और वेंटीलेटर युक्त है, ताकि मरीजों को उनकी बीमारी के अनुसार ऑक्सीजन मोहिया कराई जा सके और इलाज भी बेहतर ढंग से किया जा सके। राजधानी में आज 11 54 मरीज भले ही कोरोना संक्रमित मिले हो, राजधानी के कोविड-19 हॉस्पिटलों का आलम यह है कि अभी भी आईसीयू और वेटिंलेटर नहीं मुहैया हो पा रहा है। राजधानी में कोरोना कार्यों का प्रबंधन देख रहे डॉक्टर जी एस बाजपेई ने बताया कोरोना संक्रमण भले ही काम हुआ हो, लेकिन अभी भी हाई अलर्ट कहना जरूरी है। क्रोना संक्रमण की दूसरी लहर काफी तेज है और इसकी चपेट में लोग तेजी से आए हैं इसलिए पूरी तरह सावधानी बरतनी चाहिए। सरकार द्वारा निर्देशित प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन करना चाहिए। मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कड़ाई से करना चाहिए। उन्होंने बताया कि लॉकडाउन से कोरोना संक्रमण की चेन ब्रेक करने में मदद मिल रही है। इसलिए लोगों को खुद भी जागरूक होते हुए सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने बताया संक्रमित मरीजों के संपर्क में आने वाले लोगों का पता लगा कर के जांच की जा रही है। फिलहाल अगर आज देखा जाए तो राजधानी में 3229 संक्रमित मरीजों ने कोरोना की जंग जीत ली। लेकिन अभी भी कोरोना संक्रमण से मरने वाले मरीजों की संख्या में खास कभी नहीं आई है।
मंगलवार को भी कोरोना संक्रमण से 23 लोगों की मौत हो गई। विभिन्न हॉस्पिटलों में इलाज के दौरान कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज के दौरान मौत हो गई, इनमें ज्यादातर गंभीर मरीज थे। मंगलवार को सिविल अस्पताल में स्वास्थ्य कर्मी रुबीना की कोरोना संक्रमण से इलाज के दौरान मौत हो गई। फार्मासिस्ट एसोसिएशन के पदाधिकारी सुनील यादव ने प्रदेश सरकार से स्वास्थ्य कर्मी रुबीना के परिजनों को कोरोना वारियर्स के तहत 50 लाख रुपए का मुआवजा दिए जाने की मांग की है ताकि उनके परिवार का पालन पोषण किया हो सके।












