पश्चिमी क्षेत्र के विधायक सुरेश कुमार श्रीवास्तव का कोरोना से निधन

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लखनऊ । संजय गांधी पी जी के राजधानी कोविड 19 के अस्पताल में राजधानी के पश्चिमी के विधायक सुरेश कुमार श्रीवास्तव कोरोना संक्रमण से निधन हो गया। वह पिछले कई दिनों से कोरोना के संक्रमण से ग्रसित होने पर भर्ती चल रहे थे ,लेकिन आज देर शाम इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। कोरोना संक्रमण के दूसरी लहर में राजधानी में लगातार संक्रमण कम नही हो रहा है। शुक्रवार को पांच हजार के पार ही रहते हुए संक्रमण 5682 पर रहा, लेकिन सुखद बात यह रही कोरोना संक्रमण से ठीक होने वाले मरीजों का आंकड़ा 7165 पर पहुंच गया। कोरोना संक्रमण से आज 14 मरीजों की मौत हो गयी। यह अन्य दिनों की अपेक्षा कम है। विशेषज्ञ डाक्टरों का मानना है कि कोरोना संक्रमण से ठीक होने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ना तो अच्छी बात है, लेकिन कोरोना से संक्रमित मरीजों की संख्या में गिरावट होनी चाहिए।
राजधानी में पिछले सात दिनों से पांच हजार से ज्यादा कोरोना संक्रमण के मरीज लगातार मिल रहे है। शुक्रवार को 5682 मरीज मिलने के बाद एक बार फिर भर्ती होने की वेंटिग बढ़ गयी। ऐसे में गंभीर मरीजों को बिस्तर मिलना तो मुश्किल हो ही रहा है। होम आइशोलेशन के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इलाज कर रहे विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना संक्रमण में काफी संख्या में ऐसे मरीज आ रहे है, जिनकी जांच में निमोनिया मिल रहा है आैर काफी हद तक संक्रमित हो चुके होते है। ऐसे लोगों में अगर पहले से डायबिटीज, लंग या कार्डियक डिजीज होती है तो उन्हें दिक्कत ज्यादा होने लगती है। डाक्टरों का मानना है कि गंभीर मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। होम आइशोलेशन से भी लोग गंभीर हालत में आ रहे है। उन्होंने बताया कि अक्सर लोग कोविड -19 के प्रोटोकाल का पूरी तरह से पालन नही करते है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा नहीं है कि गंभीर लोग ठीक नहीं रहे है,लेकिन काफी संख्या में ऐसे लोग भी है जिनमें कोई लक्षण ही नही है आैर वह ठीक हो गये। अगर स्वास्थ्य विभाग की माने तो कोरोना संक्रमण ने इस बार आवासीय कालोनियों को ज्यादा प्रभावित किया है। गोमती नगर, इंदिरा नगर, अलीगंज, आशियाना, आलमबाग सहित अब तो कई छोटी- छोटी आवासीय बस्तियां है। जहां पर कोरोना संक्रमण तेजी से बढ़ा है। कोरोना संक्रमण ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि 7185 मरीज ठीक होना अच्छा है, लेकिन संक्रमण होने वाले मरीजों की संख्या भी कम होनी चाहिए। खास कर गंभीर मरीजों की संख्या हो।

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