लखनऊ। राजधानी में आक्सीजन के छोटे सिलेंडरों की कमी बन गयी है। कही भी छोटे आक्सीजन सिलेंडर विद किट नहीं पा रहा है। ऐसे में यूज एंड थ्रो वाले आक्सीजन सिलेंडर की मांग बढ़ती जा रही है। यह भी बड़ी मुश्किलों से मिल पा रहा है। इस उपयोग सबसे ज्यादा कोरोना के होम अाइशोलेशन वाले मरीज कर रहे है,जिनकी सांस फूल रही है आैर अस्पतालों में जगह नही मिल पा रही है। आक्सीजन सप्लाई करने वाले कम्पनियों का कहना है कि अस्पतालों में आक्सीजन सिलेंडर ही किसी तरह दे पा रहे है।
राजधानी में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मरीजों के साथ ही होम आइसोलेशन में रहने वाले मरीजों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। होम आइशोलेशन में रहने वाले मरीजों में सांस फूलने की दिक्कत अक्सर मरीजों को होने लगती है। इसमें बुजुर्गो की संख्या ज्यादा होती है। तीमारदारों का कहना है कि वह लोग कोविड कंट्रोल रूम में फोन करते है, लेकिन फोन उठता ही नही है या फिर मरीज की पूरी जानकारी लेकर बिस्तर की उपलब्धता के आधार पर फोन करने का आश्वासन दिया जाता है। गोमती नगर निवासी सुयस शुक्ला ने बताया कि उनके पिता कोरोना पाजिटिव आये है। उन्हें भर्ती कराने के लिए कोविड कंट्रोल रूम कई बार फोन किया, फोन वेंटिग में जाता है अौर बारी आने पर कट जाता है। ऐसे में अगर सांस फू लने लगती है आैर तत्काल कोविड अस्पताल में भर्ती कराना मुश्किल होता है तो इस बीच आक्सीजन की आपूर्ति बरकरार रखने के लिए छोटा आक्सीजन सिलेंडर को किराये पर लाने का प्रयास किया, लेकिन कहीं मिलने पर यू एंड थ्रो आक्सीजन सिलेंडर बारह लीटर लाये है। यह भी एक दिन पहले नोट कराने पर मिला है। सात सौ रुपये की कीमत वाले सिलेंडर के साथ आक्सीमीटर भी 1200 रुपये का लेना होता है। कमोबेश ज्यादातर लोग आक्सीजन सिलेंडर विद किट किराये पर ले रहे है, जहां मिल रहा है वहां मनमाना किराये लिया जा रहा है। ज्यादातर आक्सीजन आपूर्ति करने वाली कम्पनियो का कहना है कि वह लोग अस्पतालों को तो सिलेंडर बड़ी मुश्किल से दे पा रहे है। ऐसे में छोटे आक्सीजन सिलेंडर दे पाना मुश्किल है।












