दो तरफा आदेश से बेहाल है लिंब सेंटर अधिकारी

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लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के दो तरफा आदेश से लिंब सेंटर के अधिकारी चकरा गए हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश पर केजीएमयू प्रशासन एक तरफ तो जापानी इंसेफेलाइटिस , मस्तिष्क ज्वर के मरीजों के लिए तैयारी करने का निर्देश देता है । दूसरी तरफ लिंब सेंटर से कार्यशाला हटाने और विभाग को जल्द से जल्द खाली कर कोविड-19 हॉस्पिटल बनाने का निर्देश भी दे देता है । अब डॉक्टरों और लिंब सेंटर के जिम्मेदार अधिकारियों को यह समझ नहीं आ रहा कि वह जापानी इंसेफेलाइटिस मरीजों के इलाज के लिए वार्ड को तैयार करें या कोविड-19 हॉस्पिटल के लिए लिंब सेक्टर को खाली करने के आदेश को प्राथमिकता दें। दरअसल केजीएमयू प्रशासन लिंब सेंटर में चल रहे मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट को बंदी के कगार पर ला रहा है।

लिंब सेंटर की कार्यशाला जिसमें कृत्रिम अंग बनाए जाते हैं तथा मरीजों के लिए पुनर्वास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली फिजियोथेरेपी यूनिट को केजीएमयू प्रशासन हर हाल में बंद करने पर जुटा है। उधर प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा के पत्र ,जिसमें कहा गया है कि जापानी इंसेफिलिटीएस,बच्चो के मस्तिष्क ज्वर और एक्यूट इंसेफिलिटीएस जेई, और एई का प्रकोप जुलाई और अगस्त में सबसे ज्यादा होता है, अतः उनके इलाज की तैयारी प्राथमिकता पर की जाय, इसके अनुपालन में चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने 6 जुलाई को एक पत्र विभागाध्यक्ष लिम्ब सेंटर को भेजा है कि प्रदेश का एक मात्र जेई और एई का पुनवार्स वार्ड पूरी तरह से तैयार रखा जाय। बताते चले कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर जैपनीस इंसेफेलाइटिस के मरीजों के इलाज और पुनर्वास के लिए 4 साल पूर्व 5 करोड़ की लागत से लिम्ब सेंटर में बनाया गया था।

आश्चर्य की बात है कि केजीएमयू प्रशासन चिकित्सा शिक्षा प्रमुख सचिव के आदेश को करने के बाद केजीएमयू प्रशासन की टास्क फोर्स ने 6 जुलाई को ही बैठक करके लिम्ब सेंटर को फिर कोविड अस्पताल निर्माण में तेजी लाने का आदेश दिया।
केजीएमयू में चर्चा है कि एक तरफ प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा और रजिस्ट्रार ने लिम्ब सेंटर को जेई, एई के इलाज के लिए पालन करने के लिए के कहा है तो दूसरी तरफ केजीएमयू टास्क फोर्स इस विभाग को कोविड में बदलने के लिए बार बार आदेश कर रही है। वहीं दूसरी तरफ केजीएमयू संक्रामण रोग अस्पताल के लिए 15 एकड़ भूमि शहर के बाहर जहाँ आवागमन कम हो वो जगह शासन से मांग रहा है तो दूसरी तरफ केजीएमयू घनी बस्ती लिम्ब सेंटर को कोविड कोरोना जैसी महामारी का अस्पताल लिम्ब सेंटर में बना कर दिव्यांगजन के अधिकारों एवं इलाज पुनर्वास समाप्त करना चाहता है।

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