लिम्ब सेंटर में कोविड हास्पिटल: कर्मचारी संगठनों व नागरिकों ने किया विरोध

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लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के लिम्ब सेंटर को कोविड-19 हॉस्पिटल बनाए जाने हेतु दोबारा प्रस्ताव भेजे जाने की सूचना मिलने से एक बार फिर विरोध के स्वर उठने लगे है। कर्मचारी संगठनों ने चिकित्सर शिक्षा विभाग को पत्र भेज कर विरोध किया है। साथ ही सेंटर के आस-पास की कालोनी के नागरिकों ने हस्ताक्षर अभियान चलाकर काननू मंत्री बृजेश पाठक को पत्र भेजा है।

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रमुख उपाध्यक्ष सुनील यादव ने कहा कि द्विव्यांग मरीजों की समस्याओं के संबंध में कर्मचारी शिक्षक संयुक्त मोर्चा द्वारा चिकित्सा शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर पूरी समस्या से अवगत कराया था। मोर्चे का कहना है कि चोट लगे हुए मरीजों में 30 से 40 मरीजों को आर्थोपेडिक इंटरवेंशन की जरूरत होती है। वास्तव में यह सेंटर रीढ़ की हड्डी की चोट, आथ्रोप्लास्टी का एकमात्र सेंटर है। जापानी इंसेफेलाइटिस के पुनर्वास के लिए मरीजों को भर्ती करने का एकमात्र केंद्र यही है। प्रतिवर्ष लगभग 65000 से अधिक मरीज इस सेंटर द्वारा उपचारित किए जा रहे हैं। बच्चों की हड्डियों से संबंधित समस्याओं का इलाज भी यहां पर होने के साथ ही इसी सेंटर में स्पोर्ट्स मेडिसिन का भी सेंटर है ।
लिम्ब सेंटर प्रदेश का अकेला केंद्र है। इसमें दिव्यांगजनो के लिए उपकरण बनाए जाते हैं।

इस विभाग को केवल दिव्यांगजन के कार्यों के लिए प्रयोग किया जा सकता है। इसका जिक्र केजीएमयू एक्ट में भी है। ऐसे में यदि लिम्ब सेंटर को प्रसाशन कोविड-19 अस्पताल बनाया जाता है तो ये शासनादेश व विश्वविद्यालय एक्ट का उलंघन होगा। इस भवन के निकट पुलिस आयुक्त का दफ्तर है । घनी बस्ती जवाहर नगर, रिवरबैंक कॉलोनी है, इसलिए यहां संक्रमण के प्रसार का खतरा ज्यादा है। मोर्चे का कहना है कि कंवेंशन सेंटर को कोविड हॉस्पिटल में आसानी से तब्दील किया जा सकता है। इसके अलावा परिसर में कई अन्य भवन हैं जो बनकर लगभग तैयार हैं। मोर्चे के अध्यक्ष वी पी मिश्रा ने कहा कि ये एक मात्र ऐसा संस्थान है जहां प्रतिवर्ष लगभग 8000 कृत्रिम अंग अवयव बनाए जाते है, इस संस्थान में एकमात्र इम्यूनोलॉजिकल लैब है। यहां प्रतिवर्ष लगभग पच्चीस सौ मरीज भर्ती होते हैं।

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