लखनऊ। इंडिया डायबिटीज केयर इंडेक्स (आईडीसीआई) के हाल के आंकड़ों के अनुसार राजधानी में पिछले साल की तिमाही के मुकाबले, जनवरी से मार्च के बीच ग्लाइकोसिलेटेड हीमोग्लोबिन या एचबीएसी का स्तर 8.21 से बढ़कर 8.28 पहुंच गया है। एचबीएसी के स्तर में वृद्धि का यह आंकड़ा उस समय आया है, जब चिकित्सकीय शोधों में यह कहा जा रहा है कि डायबिटीज से पीड़ित लोगों को कोविड-19 की वजह से ज्यादा गंभीर परिणामों का खतरा बढ़ गया है।
एचबीएसी टेस्ट से पिछले तीन महीनों के दौरान के औसत ब्लड ग्लूकोज स्तर का पता चलता है और लंबे समय में ब्लड ग्लूकोज नियंत्रण करने का सबसे अच्छा इंडीकेटर माना जाता है। लखनऊ में 55 वर्ष की औसत आयु के 63 पुरुषों और 37 महिलाओं ने परीक्षण में हिस्सा लिया।
यही नहीं, जांच में भोजन के बाद का ग्लूकोज का स्तर जनवरी से मार्च की तिमाही में 265 एमजी/डीएल पाया गया। वहीं खाली पेट ग्लूकोज का स्तर 168 एमजी/डीएल था। डायबिटीज के साथ रह रहे लोगों को यदि कोविड-19 का संक्रमण हो जाता है तो उन्हें गंभीर लक्षण और समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे बुजुर्ग जो पहले से ही हाइपरटेंशन, हार्ट डिजीज, पल्मोनरी डिसऑर्डर और ओबेसिटी जैसी परेशानियों से जूझ रहे हैं, उन्हें कोविड-19 की वजह से और भी गंभीर परिणाम भुगतने का खतरा है।
डोक्राइनोलॉजी डॉ. शरद कुमार ने कहना है कि कोविड-19 की वजह से डायबिटीज से पीड़ित लोगों को अपनी सेहत और तंदुरुस्ती को लेकर सतर्क रहना चाहिये। वर्तमान में देश में 77 मिलियन से भी ज्यादा लोग डायबिटीज के साथ जीवन व्यतीत रहे हैं। लॉकडाउन की स्थिति में उनकी पर्याप्त देखभाल हो सके और उनकी समस्या सही तरीके से मैनेज करने में मदद मिल सके, इसके लिये भारत सरकार ने कहा कि डायबिटीज के सभी ज्ञात,पहचान किये गये मरीजों को आशा (एक्रीडेटेड सोशल हेल्थ एक्टिविस्ट) या एसएचसी (सब हेल्थ सेंटर्स) के माध्यम से पर्ची के अनुसार तीन महीने की दवाइयां उपलब्ध करायी जायेंगी।
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