लखनऊ। कोरोना के मरीजों के इलाज के लिए वेंटिलेटर की खरीद में एक बार विवाद उठने लगा है। वेंटिलेटर की खरीद में गडबड़ी की शिकायत शासन पर की गयी हंै। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि एक विशेष कम्पनी को टेंडर में स्थान देने के नियमों को ही बदला जा रहा है। ऐसे में दूसरी कंपनी टेंडर प्रक्रिया से बाहर हो जा रही है। शिकायती पत्र में विशेषज्ञों की कमेटी बनाकर जांच कराने की मांग की गयी है।
अब कोविड -19 की तैयारी में वेंटिलेटर खरीदने के लिए संस्तुति दी गयी है। इसके लिए चिकित्सा शिक्षा विभाग मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन को 121 वेंटिलेटर खरीदने के लिए निविदा आमंत्रित करने के लिए कहा है। इस बीच शासन को भेजे गये पत्र में आरोप लगाया है कि चिकित्सा शिक्षा विभाग के कुछ चुनिंदा अधिकारियों द्वारा एक विशेष कंपनी के लिए अपने स्तर पर तकनीकी मानक का निर्धारण कर रहा है।
कुछ दिन पहले फिर वेंटिलेटर खरीद के लिए फिर टेंडर निकाला गया है, परन्तु इसमें स्पेशिफिकेशन को अनिवार्य कर दिया गया है। आरोप है कि इस स्पेशिफि केशन दूसरी कंपनियां अपने आप टेंडर प्रक्रिया से बाहर हो जाएंगी। क्योंकि संबंधित स्पेशिफिकेशन सिर्फ एक ही कंपनी तैयार करती है। इस पूरे मामले को लेकर एक बार फिर वेंटिलेटर खरीद से जुड़ी कंपनियों ने मुख्यमंत्री व प्रमुख सचिव को पत्र भेजा है। इसमें कहा है कि जब उनके वेंटिलेटर को सभी मानकों को सही बताया गया है और वे कम शुल्क में मानक के अनुसार वेटिलेटर उपलब्ध करा रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि वेंटिलेटर विशेषज्ञों द्वारा कंपनियों के स्पेशिफिकेशन का मूल्यांकन करा लिया जाए। इसके बाद खरीद प्रक्रिया की जाए।
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