लखनऊ। एसजीपीजीआई में दो दिन पहले ओपीडी में पहुंचे मरीज के कोरोना पॉजिटिव होने से हड़कम्प मच गया है। आनन-फानन में ओपीडी में संबंधित मरीज को देखने वाले डॉक्टर को कोरेंटिन कर दिया गया, लेकिन उस समय ओपीडी में मौजूद अन्य लोगों पर पता नहीं किया जा रहा है। चर्चा है कि ओपीडी में मरीज था कि अन्य को संक्रमण होने की आशंका ज्यादा है।
बताते चले कि एसजीपीजीआई में दो दिन पहले राजधानी खदरा निवासी मरीज डायलिसिस कराने पहुंचा था। नेफ्रोलॉजी की ओपीडी में पहुंचे, इस मरीज की डायलिसिस की जानी थी। मरीज की प्राथमिक जांच के बाद रेजिडेंट को कोरोना के लक्षण होने का शक हो गया। उन्होंने डायलिसिस से पहले कोरोना की जांच करवाई। जांच रिपोर्ट पॉजिटिव होने पर मरीज कोरोना वार्ड में भर्ती कर लिया गया। मरीज को देखने वाले रेजिडेंट और संकाय सदस्य को भी क्वॉरेंटाइन कर दिया गया है। नेफ्रोलॉजी की ओपीडी को भी सेनेटाइजेशन कराया गया है, लेकिन जिस दिन यह पॉजिटिव मरीज ओपीडी में पहुंचा था, वहां अन्य मरीज और उनके तीमारदार भी मौजूद थे। उनके बीच में ही यह मरीज मौजूद था। इससे उनमें कोरोना संक्रमण होने की ज्यादा आशंका है।
इसके बाद भी इन मरीजों व तीमारदारों की स्क्रीनिंग नहीं कराई गई। चर्चा है कि नेफ्रोलॉजी की ओपीडी में आने वाले मरीज और तीमारदार जहां जहां जाएंगे वहां कोरोनावायरस फैल सकता है। इस बारे में पीजीआई प्रशासन का तर्क है कि ओपीडी में सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ध्यान रखा जाता है। इसलिए अन्य मरीजों के संपर्क में आने की संभावना नहीं है। मरीज को देखने वाले डॉक्टर को क्वॉरेंटाइन करा दिया गया है। ओपीडी को आइसोलेट करा दिया गया है। सीएमओ डा. नरेन्द्र अग्रवाल का कहना है कि नेफ्रोलॉजी की ओपीडी में कहां-कहां के मरीज के संबंध में कोई सूचना नहीं मिली है। यदि मरीज व तीमारदारों के सीधे सम्पर्क में होने की जानकारी होने पर जांच करायी जाएगी।
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