पीजीआई : अस्सी करोड़ लोगों का इलाज सरकारी व्यवस्था के सहारे

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लखनऊ। देश के 33 करोड़ कही भी इलाज करा सकते है चाहे वह विदेश में ही क्यो न करना पड़े। 20 करोड़ लोग इलाज के लिए थोड़ा बचत करते है, हेल्थ इंश्योरेंस आदि के सहारे रहते है, जबकि 80 करोड़ लोगों के पास इलाज के लिए कोई कुछ नहीं है। वह पूरी तरह सरकार के सिस्टम व योजनाओं पर निर्भर है इन लोगों के लिए आयुष्मान जैसी योजना कारगर साबित हो सकती है। यह बात संजय गांधी पीजीआई के 36 वें स्थापना दिवस सामोरह के मुख्य अतिथि भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के पूर्व महानिदेशक पद्मश्री डा. एनके गांगुली ने कही। उन्होंने कहा कि टर्सरी केयर हेल्थ केयर का बोन है इसके साथ सेकेंड्री और पब्लिक हेल्थ सिस्टम पर काफी काम करने की जरूरत है। इस मौके पर निदेशक प्रो.एके त्रिपाठी ने संस्थान की प्रगति के बारे में विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत किया। इसके अलावा निदेशक डा. एके त्रिपाठी ने अवार्ड देकर सम्मानित किया।

डा. गांगुली ने कहा कि संस्थान के न्यूरो साइंस, क्लीनिकल इम्यूनोलाजी एंड रूमैटोलाजी, न्यूक्लियर मेडिसिन, सीवीटीएस और गैस्ट्रोइंट्रोलाजी विभाग देश के रोल माडल है। इन विभागों ने देश में इलाज और विशेज्ञ तैयार करने में अहम भूमिका निभायी है। उन्होंने कहा कि न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट(रीढ़ की हड्डी में फोड़ा), स्पाइना बाई फीडा की परेशानी के साथ पैदा होते है। मां यदि फोलिक एसिड का सेवन गर्भधारण करने से पहले शुरू कर दे, तो इस परेशानी की आशंका को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इस मौके पर पूर्व निदेशक प्रो.राकेश कपूर, संस्थान की स्त्री रोग विशेषज्ञ डा.दीपा कपूर, प्रो.एसके अग्रवाल सहित कई विशेषज्ञ मौजूद रहे। देर शाम को क ल्चर प्रोग्राम का आयोजन किया गया।

इनको मिला सम्मान –

बेस्ट डीएम स्टुडेंट एवार्ड : सीसीएम के डा. बीके भास्कर ने क्रिटिकल केयर में विशेष शोध किया है।
बेस्ट एमसीएच स्टुडेट : यूरोलाजी के डा. नवीन कुमार इन्होने कैंसर युक्त ब्लैडर को निकाल कर आंत से मूत्राशय बनाने के साथ ही 6 शोध किया है।
बेस्ट टेक्नोलाजिस्ट अवार्ड : हिमैटोलाजी विभाग के मनोज कुमार सिंह और माइक्रोबायलोजी विभाग से शत्र्तुघन सिंह को दिया गया।
बेस्ट नर्स : नेफ्रोलाजी विभाग की रोसीलिना और इंडोक्राइन विभाग के मो. यूसुफ खान को दिया गया।

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