लखनऊ। अस्थमा के मरीजों को नियमित तौर पर डाक्टर से परामर्श लेकर इन्हेलर का प्रयोग करना चाहिए। इन्हेलर दवाओं से ज्यादा कारगर होगा आैर मरीज में टारगेड थेरेपी की तरह काम करता है। यह बात गोमती नगर स्थित डा. राम मनोहर लोहिया संस्थान की डा. सीतांशू श्रीवास्तव कही। वह अस्थमा जागरुकता कार्यक्रम के तहत होटल में पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रही थीं।
डा. श्रीवास्तव ने बताया कि मौसम में बदलाव होते ही 30 से 37 प्रतिशत अस्थमा के मरीजों की दिक्कत होने लगती है। समय पर सही इलाज न होने पर लगभग बारह प्रतिशत मरीजों की मौत तक हो जाती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में दवाओं के सेवन करने से बेहतर तत्कालिक इलाज के लिए इन्हेलर बेहतर विकल्प है। उन्होंने बताया कि अस्थमा को लेकर कई तरह की भ्रांतिया बनी रहती थी। लोगों को लगता था कि एक बार इन्हेलर का प्रयोग करने से हमेशा इसे अपनाना होता है। जबकि ऐसा नहीं होता है। लगभग 20 प्रतिशत लोगों को ही इन्हेलर प्रयोग की सही जानकारी है। उन्होंने बताया कि अस्थमा के मरीज बच्चे बुजुर्ग एवं महिलाएं भी हैं। वर्तमान में कम उम्र के लोग भी अस्थमा की चपेट में आ रहे है। इन्हें समय पर सही व सटीक इलाज की आवश्यकता है।
इस बीमारी से बचाव के लिए सर्दी के मौसम में सावधानी बरतें। चेस्ट रोग विशेषज्ञ डा. एके सिंह ने बताया कि अगर देखा जाए तो पांच से 11 वर्ष के 15 प्रतिशत बच्चे अस्थमा की चपेट में हैं। उन्होंने बताया कि बच्चों में अस्थमा के कई कारण होते है। समय से पहले शिशु का जन्म, कम वजन, अनुवांशिक या फिर गर्भावस्था के दौरान महिला के पोषण में कमी भी हो सकती है। देखा गया है कि पोषण की कमी से कमजोर शिशु का जन्म हो सकता है। ढाई किलो वजन से कम शिशु में अस्थमा आसानी होने की संभावना होती है। आंकड़ों के अनुसार कम वजन के करीब 30 प्रतिशत बच्चों में यह समस्या देखने को मिलती है।
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