लखनऊ। लाडले को बेहतर सुविधाएं देने के चक्कर में उसकी दिनचर्या गड़बड़ा रही है अौर उसकी बढ़ती स्वास्थ्य सम्बधी लक्षणों पर अभिभावक ज्यादा ध्यान नहीं दे पाते,जब तक वह गंभीर रूप न धारण कर ले। जागरूकता से लोग यह तो जानने लगे है कि बच्चों में डायबिटीज होता है, लेकिन उसके लक्षण पहचानने व अपनी भूमिका को नजर अंदाज कर जाते है। अगर बच्चे के लक्षणों को पहचानने लगे, डायबिटीज होने से पहले ही पहचान सकते है आैर नियंत्रण करके बच्चे के जीवन को सुधार सकते है।
बच्चों की डायबिटीज के लक्षणों के बारे में किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के बाल रोग विभाग के वरिष्ठ डा. सिद्धार्थ बताते है कि बच्चे को ज्यादा भूख लगती है। बहुत जल्दी-जल्दी प्यास लगती है या फिर वो बार-बार पेशाब करने जाता है, तो इन लक्षणों को नजर अंदाज न करें आैर विशेषज्ञ डाक्टर से परामर्श लें। देखा गया है कि बच्चों में टाइप-2 डायबिटीज ज्यादा होता है, जब बच्चों में शुगर लेवल असामान्य रूप से बढ़ने लगता है आैर उन्हें बहुत ज्यादा प्यास लगती है। इस दौरान बच्चें पानी पीने के अलावा, कोल्ड ड्रिंक के अलावा पैक जूस जैसी लिक्विड पेय पदार्थो को ज्यादा पीने लगते हैं। इस लक्षण को विशेष रूप से ध्यान दें। यह भी हो सकता है कि जब बच्चे की प्यास बढ़ेगी और वो ज्यादा लिक्विड पियेगा तो पेशाब जाना पड़ेगा। अगर दोनों लक्षण बच्चे में दिख रहे तो विशेषज्ञ डाक्टर से परामर्श ले। यह लक्षण डायबिटीज की शुरुआत भी हो सकती है।
बच्चे को अगर डायबिटीज की समस्या हो जाए ,तो अक्सर उनकी भूख बढ़ जाती है। इस कमी को दूर करने के लिए शरीर को खाना ज्यादा लेना पड़ता है। बच्चा ज्यादा खाना खाता रहता है, लेकिन उसका वजन बढ़ने की बजाये कम होने लगता है। यह सबसे सामान्य लक्षण माना जाता है।
डा. सिद्धार्थ मानते है कि जंक फूड के सेवन से बढ़ता मोटापा, खेल कूद तथा व्यायाम में कमी, कैरियर को लेकर तनाव, लैपटाप, मोबाइल व कम्प्यूटर पर ज्यादा देर तक काम करना व गेम खेलना होता है।
बाल रोग विशेषज्ञ डा. जीके सिंह बताते है कि देश में टाइप-1 मधुमेह से पीड़ित अंडर-15 बच्चों की संख्या लगभग 70 हजार है, जबकि टाइप-2 मधुमेह से पीड़ितों की संख्या 40 हजार है। जागरूकता की कमी से इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है। आंकड़ों की माने तो 68 प्रतिशत शहरी बच्चे नियमित व्यायाम नहीं करते हैं। बच्चों में मोटापा का यह भी एक आम कारण होता है।
उन्होंने बताया कि लड़कियों में तथा अधिक वजन वाले बच्चों में डायबिटीज पाया गया है, या फिर जिनकी फैमली में डायबिटीक हिस्ट्री हो। डा. सिंह बताते है कि बच्चे दुबले पतले होते है, उन्हें डायबिटीज होगा, पता ही चलता है। इनमें मेलाइटिस डायबिटीज होता है। उन्होंने कहा कि टाइप- 2 मधुमेह से बच्चों को दूर रखना है तो उन्हें पौष्टिक तथा संतुलित आहार खिला चाहिये। शक्कर,मिठाई , पेस्ट्री, कोल्ड ड्रिक, चिप्स, और अन्य जंक फूड बच्चों में मोटापा टाइप 2 मधुमेह को बढ़ाने का काम करते हैं। बच्चों को इंडोर गेम खेलने के बजाय आउटडोर गेम खेलने भेजना चाहिए।
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