संस्थान के हास्पिटल ब्लाक में कार्डियक ओपीडी बंद!

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लखनऊ। गोमती नगर स्थित डा. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के हास्पिटल ब्लाक में कार्डियक ओपीडी बंद चल रही है। इससे अब ओपीडी में आने वाले मरीजों को सौ गुना शुल्क देकर संस्थान की कार्डियक ओपीडी में इलाज कराना पड़ रहा है। सौ गुना शुल्क देकर पंजीकरण कराने के बाद भी इलाज के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। जांच कराने का शुल्क अतिरिक्त देना पड़ता है। मरीजों को दवा भी बाहर की मेडिकल स्टोर से लेना पड़ता है। लोहिया संस्थान के निदेशक डा. एके त्रिपाठी का दावा है कि जल्द ही वहां की ओपीडी में मेडिसिन विभाग से एक डाक्टर की तैनाती कर दी जाएगी, जो कि मरीजों को परामर्श दे सकेंगा आैर गंभीर मरीजों को इमरजेंसी के माध्यम से संस्थान में भर्ती कर लिया जाएगा।

लोहिया अस्पताल अब हास्पिटल ब्लाक कहलाने लगा है। विलय के बाद हास्पिटल ब्लाक की ओपीडी में हालत बदहाल होती जा रही है। यहां की कार्डियक ओपीडी बंद चल रही है। कमरों पर ताला लटक रहा है। दरअसल यहां पर तैनात महत्वपूर्ण डा. डीआर सिंह, डा. बीआर जायसवाल सेवानिवृत्त हो चुके है,जबकि डा. खटवानी का विलय के बाद तबादला हो गया है। इसके बाद लोहिया संस्थान प्रशासन ने इस महत्वपूर्ण ओपीडी के ठप होने पर अभी तक कोई ध्यान नहीं दिया है, जिसके कारण ओपीडी आने वाले मरीज बेहाल हो रहे है। मरीज सुबह लाइन में लगकर जब पर्चा बनवाने के बाद हास्पिटल ब्लाक की कार्डियक ओपीडी पहुंचाता है तो वहां पर ताला लटका मिलता है। सबसे ज्यादा पुराने मरीज परेशान हो रहे है, जो कि यहां की ओपीडी में इलाज करा रहे थे। सोमवार को कार्डियक ओपीडी में ब्लड प्रेशर व घबराहट की शिकायत होने पर पहुंचे सतीश ने बताया कि यहां की ओपीडी में ताला लगा है।

यहां से लोहिया संस्थान की ओपीडी में जाने के लिए कहा गया। वहां पर पहुंचने पर पहले पंजीकरण के लिए लम्बी लाइन लगने के बाद सौ रुपये शुल्क देना पड़ा। इसके बाद ओपीडी में लम्बी लाइन दिखाने के लिए लगना पड़ा। डाक्टर ने ब्लड व ईसीजी जांच के लिए कह दिया तो उसका शुल्क जमा करने के लिए मशक्कत करनी पड़ी। इस प्रक्रि या में घंटो निकल गये। कमोबेश हास्पिटल ब्लाक आने वाले सभी मरीजों का कहना है कि जो काम एक रुपये के पर्चे पर हो जाता है। वह अब सौ गुना शुल्क जमा करके पंजीकरण कराना पड़ता है। उसके बाद अन्य जांच के लिए अन्य शुल्क भी जमा करना पड़ता है। ऐसे में एक रुपये के पर्चे होने वाले इलाज के लिए सौ गुना से ज्यादा खर्च हो जाता है।

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