अब एक वैक्सीन से ही होगा जापानी बुखार से बचाव

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लखनऊ – प्रदेश पेडिकान के तत्वावधान में चल रहे 39 वां स्टेट कांफ्रेंस ऑफ इंडियन एकेडमी ऑफ पीडिट्रिक्स के अंतिम दिन आज बच्चों को लगने वाली वैक्सीन, बच्चों की पेट से सम्बंधित बीमारीयों, बच्चों में होने वाले कैंसर पर बाल रोग विशेषज्ञों ने चर्चा की गयी। कार्यशाला में जापानी बुखार से बचाव की जानकारी भी दी गयी। कार्यक्रम में डा. आशुतोष वर्मा ने बताया कि आज कार्यक्रम के अंतिम दिन जापानी बुखार, बच्चों में होने वाली डाइबिटीज़, पेशाब में होने वाले संक्रमण रोगों, बच्चों में कैंसर आदि विषयों पर विशेषज्ञों ने जानकारी दी।

डा. अनूप बाजपेयी ने कहा कि अभी तक हम लोग जापानी बुखार से बचाव पर उसके रोकथाम के वैक्सीन की दो डोज एक नियमित समय की अंतराल पर लगाते थे, पर अब जापानी बुखार से बचाव के लिए अभी तक की सबसे अच्छी वैक्सीन आ गयी है। इस वैक्सीन का एक ही डोज जापानी बुखार से बच्चों का बचाव करेगा। सबसे बड़ी बात इस वैक्सीन की लागत भी आम आदमी के बजट के अंदर होगी।

मुम्बई से आये डॉ शफी ने बताया कि बाजार में एक ऐसी वैक्सीन है जो एक साथ 6 बीमारीयों की रोकथाम करेगी। यह एक कम्बाइन वैक्सीन है जिसमे खसरा, काली खांसी, टिटनेस, पोलियो, हिपेटाइटिस बी, निमोनिया जैसी 6 बीमारियों का इलाज एक ही इंजेक्शन में शामिल है। डॉ. बिपिन वशिष्ठ ने कहा कि डॉक्टर्स को बच्चें पर उसी वैक्सीन का इस्तेमाल करना चाहिए जो उस पर सबसे ज्यादा असरदार हो। उन्होंने कहा कि अभी भारत सरकार जो वैक्सीन कर रही है, ये अच्छी है पर अगर इसकी जगह सरकार को वैक्सीन करनी चाहिए।

पूर्व महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा व बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. वी.एन त्रिपाठी ने बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए पैरेंट्स को गोविंद नाम का फ़ार्मूला दिया।

( ग्रोथ) : जब बच्चा पैदा हो उसके बाद से लगातार माँ बाप उसका लम्बाई चौड़ाई को नापते रहे.
इसको पहले दस्त के साथ ही शुरू कर दें क्योकि आज के समय बच्चों की मृत्यु का सबसे बड़ा करण डायरिया है और रेगुलर उपयोग से 90 फीसदी तक डायरिया को होने से रोका जा सकता है.
(ब्रैस्ट फीडिंग ): जन्म के आधे से एक घंटे के अंदर माँ का दूध अवश्य बच्चें को पिलाना शुरू कर दें चाहे नार्मल डिलीवरी हुई हो या साजरियन ऑपरेशन और माँ का ये दूध कम से कम दो साल तक बच्चें को पिलायें. इसी तरह जब बच्चा 6 महीने का हो जाये तो उसे साफ़ सुथरा घरेलू खाना खिलाएं.
( इम्यूनाइजेशन) : माँ को टीका टिटनेस का और बच्चें को सरकारी तालिका के अनुसार समय से लगवाते रहे ये टिका किशोरों को भी लगेगा.
(न्यूट्रिशन) : बच्चे के 6 महीने होने बाद उसे माँ के दूध के साथ सतह घरेलू पोषक आहार जैसे केला, आलू, बिस्कुट, दाल खिचड़ी, रवा की खीर खिलाते रहे.
(दवा) : दवाओं का समुचित प्रयोग यानि जब बच्चों के डाक्टर दवा यानि एंटी बायटिक बताये तब ही उसका इस्तेमाल करें अपने मन से डाक्टर न बन जायें।

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