लखनऊ: किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में कर्मचारियों द्वारा फर्जीवाड़ा किए जाने की घटनाएं लगातार सामने आ रही है। अब नया मामला केजीएमयू ओपीडी में हो रही ब्लड जांच में न तो ऑनलाइन रसीद दी गई. बल्कि साथ ही जांच रिपोर्ट भी हाथ से लिखी हुई मिली। जबकि केजीएमयू की पैथोलॉजी जांच रिपोर्ट पर विभाग का नाम के अलावा कई महत्वपूर्ण जानकारी होती है इनके ना होने पर फर्जीवाड़े को पकड़ा गया है।
शिकायत के अनुसार जौनपुर से आए मरीज पन्नालाल को मुंह का कैंसर है। 17 अगस्त को ओपीडी में दिखाने के बाद डॉक्टर ने सीटी स्कैन, ब्लड की कुछ जांचें लिखीं। सीटी स्कैन न्यू ओपीडी में ही होता है। वहां जाने पर कर्मचारियों ने बताया कि सीटी स्कैन से पहले लीवर फंक्शन टेस्ट कराना होगा। मरीज ने कहा कि डॉक्टर ने तो ब्लड की जांच लिखी है लेकिन इसमें ऐसा नहीं है। कर्मचारियों ने कहा कि जब तब एलएफटी नहीं कराओगे सीटी स्कैन नहीं होगा।
मजबूरी में मरीज को जांच करानी पड़ी। जिसके लिए कर्मचारियों ने 60 रूपए लिए और कोई रसीद भी नहीं दी। विरोध करने पर हाथ से लिखी रसीद थमा दी। कुछ देर के बाद मरीज जब रिपोर्ट लेने पहुंचा तो उसे हाथ से बनी रिपोर्ट दी गई। मामला संदिग्ध लगने पर मरीज ने अधिकारियों से शिकायत दर्ज कराई।
पैथोलॉजी रिपोर्ट पर होती है पूरी जानकारी
पैथोलॉजी रिपोर्ट पर मरीज का नाम, रेफरेंस नंबर, यूआईडी नंबर, पैथोलॉजिस्ट का नाम, केजीएमयू के विभाग का नाम, बार कोड, डेट और रिजल्ट होता है। ये सारी चीजें ऑनलाइन कंप्यूटर से टाइप की गई होती हैं। वहीं शिकायत करने वाले मरीज को जो रिपोर्ट दी गई उसमें सिर्फ केजीएमयू का नाम है और रिजल्ट, मरीज का नाम, उम्र आदि हाथ से लिखा गया है। मरीज ने शिकायत के दौरान बताया कि जो डॉक्टर ने ब्लड की दूसरी जांचें लिखी हैं वो बिल्कुल अलग हैं। इसलिए मामला संदिग्ध लगा।
मीडिया प्रभारी डॉक्टर संतोष ने बताया मामला संदिग्ध, जांच के बाद आएगी सच्चाई
इस तरह की कोई भी पैथोलॉजी की रिपोर्ट केजीएमयू में नहीं दी जाती है। आईटी सेल भी ऐसी रिपोर्ट से इनकार कर रहा है। सीटी स्कैन आदि की मशीनें प्राइवेट लगी हैं, उनके ही कर्मचारी हैं। इस संबंध में जांच की जाएगी। यह मामला संगीन है। दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
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