लखनऊ। सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार का सफाया करने के लिए आरटीआई अचूक हथियार है। हालांकि अभी भी लोग इसके प्रयोग आैर अहमियत के बारे में ज्यादा नहीं जानते है। यह बात शनिवार को केजीएमयू में राज्यपाल राम नाईक ने प्रदेश सूचना आयोग और फेडरेशन ऑफ ऑब्सटेट्रिक एंड गायनोकोलॉजिस्ट सोसाइटी ऑफ इंडिया (फॉग्सी) संस्था की ओर से आयोजित कार्यशाला में कही। शनिवार को केजीएमयू के कलाम सेंटर में आरटीआई पर कार्यशाला का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम में मुख्य सूचना आयुक्त जावेद उस्मानी सहित अन्य वरिष्ठ डा. फराह उस्मानी सहित अन्य डाक्टर मौजूद थे। राज्यपाल ने कहा कि ऐसे में सूचना आयोग के साथ मिलकर फॉग्सी ने चिकित्सा क्षेत्र में इस मौलिक अधिकार से जुड़े अहम पहलुओं से डाक्टरों को रूबरू कराने की पहल की है।
मुख्य सूचना आयुक्त जावेद उस्मानी ने कहा कि वर्ष 2005 में देश के आम नागरिकों को एक ऐसा हथियार मिला, जिसकी उन्हें काफी जरुरत थी। राइट टू इनफॉर्मेशन लागू हो जाने से आम जनता को हर वो चीज जानने का अधिकार मिला, जिसका संबंध उसकी जिंदगी से है। इस अधिनियम का अनुपालन कराने और करने में डाक्टर वर्ग आगे आए। उन्होंने यह भी कहा कि यह सिर्फ जनसूचना अधिकारियों की ही जिम्मेदारी नहीं है कि वे सूचनाएं उपलब्ध कराएं बल्कि हर वर्ग को सूचनाएं प्राप्त करने के लिए जागरुक होना होगा।
उन्होंने बताया कि कुष्ठ रोगियों को प्रत्येक माह 300 रुपयें आर्थिक मदद की जा रहीं है। फॉग्सी पब्लिक अवेयरनेस कमेटी की चेयरमैन डा. अर्चना वर्मा ने कहा कि सरकारी हों या प्राइवेट, कई मामले में डाक्टर हमेशा यह समझते है कि हमेशा आरटीआई उनके खिलाफ इस्तेमाल होने वाला हथियार है। जब कि निजी संस्थान या डाक्टरों के खिलाफ साधारण तरीके से इसका प्रयोग नहीं किया जा सकता है। कार्यशाला में डा. सुरहीता, डा. मूनिस फरीदी तथा अनुपमा सिंह भी मौजूद थी। इस मौके पर राज्यपाल ने जावेद उस्मानी, डॉ अर्चना वर्मा, डॉ फरह उस्मानी को सम्मानित किया।
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