लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के रेजीडेंट डाक्टर एसोसिएशन ने बैठक करने के बाद नियमानुसार ड्यूटी कराने के अनुरोध कुलपति से किया है। कुलपति से वार्ता न होने पाने के क्रम में एसोसिएशन ने ज्ञापन प्रेषित करके कहा है कि इससे काम दबाव भी कम होगा आैर रेजीडेंट मरीजों की क्लीनिकल सेवा भी बेहतर कर सकेगा। उसे काम के दबाव में आत्महत्या करना पड़ेगा आैर तनाव में नहीं रहना होगा।
आर्थोपैडिक विभाग के रेजीडेंट के द्वारा आत्म हत्या करने के प्रयास के बाद रेजीडेंट डाक्टरों ने एक बार फिर निर्धारित समय के अनुसार ही ड्यूटी कराने के लिए केजीएमयू को पत्र लिखा है। रेजीडेंट डाक्टरों का कहना है कि क्लीनिक स्टाफ कम होने के कारण मरीजों के इलाज का दबाव लगातार बना रहा है। लगातार 36 घंटे से ज्यादा ड्यूटी करनी पड़ती है, तो ज्यादातर साथी रेजीडेंट तनाव में रहते है, ऐसे में मानसिक उत्पीड़न होने के हालात बन जाते है। एसोसिएशन का मानना है कि अगर आठ घंटे की ड्यूटी तो रहती है इमरजेंसी में बारह घंटे भी ड्यूटी की जा सकती है। परन्तु सभी रेजीडेंट को सप्ताह में एक बार साप्ताहिक अवकाश मिलना चाहिए, अगर रेजीडेंट डाक्टर नाइट ड्यूटी करता है तो उसे पूरा दिन का अवकाश मिलना चाहिए।
सभी रेजीडेंट का मानना है कि एमसीआई के निर्देश में निर्धारित समय से ही ड्यूटी कराने का निर्देश है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने ड्यूटी की गाइडलाइन दे रखी है। यह निर्देश बहुत पुराना है,लेकिन इसका पालन नहीं किया जाता है। रेजीडेंट एसोसिएशन ने कुलपति को ज्ञापन देकर अनुरोध किया है कि अगर ड्यूटी को नियमानुसार लगाया जाए तो रेजीडेंट मानसिक रूप से स्वस्थ्य होकर मरीजों का इलाज कर सकेंगे आैर काम के तनाव में मानसिक उत्पीड़न भी रूक जाएगा। रेजीडेंट एसोसिएशन ने बैठक में सभी रेजीडेंट ने नियमानुसार ड्यूटी कराने के एक मत होकर कुलपति को ज्ञापन भी प्रेषित कर दिया है। जल्द ही उनका प्रतिनिधि मंडल केजीएमयू कु लपति प्रो. एमएलबी भट्ट से वार्ता करके अपनी समस्याओं पर चर्चा करेंगा।
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