लखनऊ. किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में सोमवार को जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर द्वारा हाथ की काटी गई नसे भले ही जोड़ दी गई हो. लेकिन इस घटना ने सभी जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों को एक बार फिर अपने सीनियर्स के उत्पीड़न के खिलाफ बोलने को मजबूर कर दिया है. उन सभी का एक मत है कि वरिष्ठों के नजरअंदाज करने के कारण सीनियर बढ़ते काम के दबाव में उनका उत्पीड़न शुरू कर देते हैं. उनका मानना है दबाव के चलते अक्सर जूनियर अपना मानसिक संतुलन तक होने लगते हैं परंतु ज्यादातर घटनाएं दब जाती हैं. जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों ने आज कुलपति से मिलकर अपनी बातों को उन तक पहुंचाने की प्रस्ताव बनाया है.
इसके लिए वह शाम को बैठक के बाद अंतिम निर्णय पर पहुंचेंगे. उधर आर्थोपेडिक विभाग में जूनियर रेजिडेंट द्वारा हाथ की नस काटने के बाद आज उसकी हालत में काफी सुधार बताया जा रहा है. केजीएमयू प्रॉक्टर डॉ RAS कुशवाहा का कहना है कि इस रेजिडेंट डॉक्टर ने अपने लिखे गए सुसाइड नोट में किसी को दोषी नहीं ठहराया है . उसका इलाज पहले से ही कराया जा रहा है. इस बात की पुष्टि उसके परिजनों ने भी की है उस पर किसी भी तरह का कोई दबाव नहीं था. डॉक्टर कुशवाहा का कहना है कि अगर सीनियर्स के द्वारा उत्पीड़न की किसी प्रकार की शिकायत की जाती है उस पर तत्काल कार्रवाई की जाती है.
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