इस विशेष तकनीक से सर्जरी कर निकाला कोलीडोकल सिस्ट

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लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के सर्जरी विभाग के लेप्रोस्कोप सर्जन विशेषज्ञ डॉ. अवनीश व उनकी टीम ने 15 वर्षीय किशोरी की जन्मजात कोलीडोकल सिस्ट (पित्त की नली की गांठ) को अत्याधुनिक लेप्रोस्कोपी तकनीक से जटिल सर्जरी की। यह सर्जरी रू एंड वाई हिपैटिकोजिनास्टमी तकनीक से की गयी। यह तकनीक से सर्जरी करना काफी जटिल है आैर अत्याधुनिक तकनीक है। इस तकनीक में कोलीडोकल सिस्ट (पित्त की नली की गांठ) को काटने के बाद रू एंड वाई तकनीक से पित्त की नली को छोटी आंत से जोड़ा जाता है। इस तकनीक से सर्जरी बहुत कम चिकित्सा संस्थानों में की जाती है आैर खर्च भी बहुत आता है। केजीएमयू प्रशासन की मदद से किशोरी की यह सर्जरी निशुल्क की गयी।

केजीएमयू के जनरल सर्जरी विभाग के डॉ. अवनीश कुमार ने पत्रकार वार्ता में बताया कि जनवरी में ओपीडी में किशारी अंकिता (15) पित्त की थैली के पास दर्द, बुखार व पीलिया की शिकायत लेकर आयी थी। उसे स्थानीय डाक्टरों ने पित्त की नली में दिक्कत होने की आशंका पर रेफर किया था। यहां लक्षणों के आधार पर जांच कराई तो पता चला कि उसे जन्मजात कोलीडोकल सिस्ट (पित्त की नली की गांठ) है। उसे सर्जरी का परामर्श दिया गया। किशोरी को कम से कम दिक्कत हो इस लिए रू एंड वाई तकनीक से सर्जरी करने तय किया गया। इस सर्जरी के लिए संसाधनो की आवश्यकता को देखते हुए आर्थिक स्थित सही नहीं होने पर केजीएमयू प्रशासन से मदद मांगी गयी। वहां से संसाधनों की मदद मिलने के बाद किशोरी का हाई स्कूल की परीक्षाओं के बाद सर्जरी करने का निर्णय लिया गया।

बीती 14 अप्रैल अंकिता को भर्ती करने के बाद 15 अप्रैल को सर्जरी की गयी। लगभग छह घंटे तक चली सर्जरी में कोलीडोकल सिस्ट को निकाल दिया गया। सर्जरी में रूएंड वाई तकनीक छोटी आंत में पित्त की नली हिपैटिक डक्ट से से जोड़ा दिया गया। शनिवार को जांच पड़ताल बाद किशोरी को डिस्चार्ज कर दिया गया। डा. अवनीश ने बताया कि इस तकनीक से सर्जरी निजी संस्थानों में दो से तीन लाख रुपये का खर्च बताया जाता है। यहां पर विभाग प्रमुख डा. अभिनव अरुण सोनकर की कोशिश व केजीएमयू कुलपति के सहयोग से किशीरी की यह मंंहगी सर्जरी निशुल्क हो गयी।
डॉ. अवनीश ने बताया कि उनकी टीम डॉ. अजय पाल, डॉ. मनीष अग्रवाल के अलावा,डॉ. अक्षय आनंद, भी मौजूद थो। इसके साथ ही रेजिडेंट डॉ. अवतार, डॉ. निजाम, एनेस्थीसिया विभाग प्रो. अनीता मलिक और डॉ. राजेश रमण, ओटी टेक्नीशियन रुपेश सिंह और महेंद्र शामिल थे।

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