प्राइवेट प्रैक्टिस की सर्जरी में मरीज हो गया यह…

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लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय प्रशासन ने तमाम दावों के बाद भी यहां के डाक्टरों की प्राइवेट प्रेक्टिस जारी है। यहां के डाक्टर लखनऊ में ही नहीं बल्कि गैर जनपदों में भी जाकर अधिक शुल्क मिलने पर निजी नर्सिग होम में सर्जरी कर रहे है, सर्जरी के बाद जब मरीज की हालत बिगड़ जाता है तो केजीएमयू रेफर करा कर इलाज देना शुरू कर देते हैं, कुछ इसी तरह का एक आरोप यूरोलॉजी के डा. मनमीत पर लगा है। संत कबीर नगर में निजी नर्सिग होम में मरीज की सर्जरी किया। इसके बाद हालत बिगड़ने पर केजीएमयू के क्रिटकल केयर यूनिट में भर्ती कर दिया। इस घटना में केजीएमयू प्रशासन ने दावा किया है कि डा. मनमीत ने केजीएमयू में ही सर्जरी की है। किसी निजी अस्पताल सर्जरी करने नहीं गये थे।

केजीएमयू का दावा कि डाक्टर ने निजी अस्पताल में नहीं विभाग में किया आपरेशन

ट्रामा सेंटर क्रिटिकल केयर यूनिट में भर्ती मरीज बाबूलाल (51) की हालत बहुत ही गंभीर बनी हुई है। यूरोलॉजी के डा.मनमीत पर परिजनों ने आरोप लगाया है कि उन्होंने संतकबीर नगर स्थित पटेल नर्सिंग होम में जाकर मरीज की सर्जरी किया। हालत ज्यादा बिगड़ने पर केजीएमयू बुलाकर यूरोलॉजी वार्ड में भर्ती करा दिया। संतकबीर निवासी बाबूलाल को किडनी में पथरी की समस्या थी,परिजनों ने लाकर केजीएमयू की यूरोलॉजी ओपीडी में दिखाया। ओपीडी में मरीज को देखने के बाद डा. मनमीत ने जांच करायी।

जांच में किडनी में पथरी की निकली। पथरी के साइज को देखते हुए डा.मनमीत ने आपरेशन कराने की सलाह दी। बाबूलाल के बेटे पंकज का आरोप है कि डा.मनमीत ने पहले तो मरीज के गृह जनपद की जानकारी ली। उसके किसी से वार्ता के वहां के स्थानीय पटेल नर्सिंग होम का पता बताते हुए देकर आपरेशन की तारीख तय कर दिया। पंकज ने आरोप है कि 22 जनवरी को मरीज का आपेरशन डा.मनमीत ने पटेल नर्सिंगहोम में किया।

सर्जरी के बाद 28 जनवरी को डिस्चार्ज कर दिया। उनका कहना है कि उस समय मरीज की हालत ठीक थी। उनका कहना है कि तीन फरवरी को मरीज के यूरीन निकलने में दिक्कत होने लगी। घबराये परिजन मरीज को लेकर पटेल नर्सिंगहोम पहुंचे। वहां पर मौजूद लोगों ने डा.मनमीत के दो दिन बाद आना बताया आैर वापस कर दिया। दो दिन मरीज को लेकर परिजन एक बार फिर नर्सिंगहोम पहुंचे तो वहां पर मौजूद डा.मनमीत ने मरीज की जांच करने के बाद स्टंट लगाने के लिए केजीएमयू बुलाया। यहां पर बीते शनिवार को परिजन मरीज को लेकर केजीएमयू पहुंचे अौर उसे डाक्टर ने यूरोलॉजी वार्ड में भर्ती कर लिया,लेकिन अचानक रात दो बजे मरीज की हालत बिगड़ गयी, जिसके बाद परिजनों ने चीखना चिल्लाना शुरू कर दिया। परेशान डाक्टरों ने जल्दबाजी में सुबह 6 बजे मरीज को ट्रामा सेंटर के क्रिटिकल केयर यूनिट में लाकर भर्ती कर दिया गया।

मरीज की हालत बिगड़ने पर परिजनों ने डाक्टर पर आरोप लगाया कि इलाज के नाम पर 85 हजार रूपये भी डाक्टर ने ले लिया। हालत बिगड़ने पर यहां लाकर डाल दिया। आपस में मैनेज करने के लिए इसकी सूचना पटेल नर्सिंगहोम पर भी जा चुकी थी। जिसके बाद वहां से एक अधिकारी परिजनों को समझाने ट्रामा सेंटर पहुंच गया। उसने परिजनों से इलाज संबंधी कागजात मांगे,जैसे ही कागजात न होने पर मरीज के लड़के को कागज लेने के लिए घर भेज दिया । इसी बीच मरीज के साथ मौजूद महिला का मोबाइल को भी रखवा लिया।

निजी अस्पताल से आया अधिकारी लगातार दबाव बनाते रहे आैर देर शाम को सभी के दबाव में केजीएमयू के सामने परिजनों ने बयान बदल दिया। उनका कहना है कि केजीएमयू में सर्जरी की गयी। जब कि सुबह से तीमारदार इलेक्ट्रानिक मीडिया को बयान दे रहे थे कि सर्जरी संतकबीर नगर में डा. मनमीत ने की। फिलहाल केजीएमयू प्रशासन भी अपने डाक्टर को बचाने में जुट गया है। उसका कहना है कि लोगों को भ्रमित किया जा रहा है।


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